यहां प्रत्येक स्तर पर अपनी बात कहने की स्वतंत्रता सबको है लेकिन न्यायिक फैसले के पहले ही मुकदमे को झूठा बताने और न्यायिक व्यवस्था को न मानने की लत संविधान विरोधी है? अपने बयानों से संस्थाओं के प्रति निष्ठा घटाना देश की संवैधानिक व्यवस्था के विरुद्ध अहितकारी परिवेश बनाना है।from Jagran Hindi News - editorial:apnibaat https://ift.tt/34LqWuR
No comments:
Post a Comment