Saturday, October 3, 2020

हास्य-व्यंग्य : एक कवि का दर्द भरा कविता पाठ, जिसे सुनकर श्रोता पानी मांगने लगते हैं और आयोजक लिफाफा

क्रांति की सूत्रधार है मेरी कविता। दरअसल मेरा कवि होना मेरे हाथ में नहीं था। यह हिंदी-साहित्य की इच्छा थी कि मैं कवि बनूं और क्रांति करूं। बाजार हो या साहित्य दर्द की मांग सर्वत्र है। सरकार भी इसके लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

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