सनातन धर्म ने जनजातीय समाज को एक तरह से वर्णविहीन छोड़ दिया। इस कारण वनवासी समाज का वर्णव्यवस्था में पूर्ण समायोजन संभव नहीं हो सका और एक बड़ा वनवासी वर्ग हिंदू होते हुए भी वर्णविहीन बना रहा। संवैधानिक व्यवस्था में वे अनुसूचित जनजाति कहे गए।from Jagran Hindi News - editorial:apnibaat https://ift.tt/34S3IVj
No comments:
Post a Comment