Sunday, July 2, 2023

शरद पवर न तब क थ कगरस क खलफ बगवत गर गई थ वसत दद पटल क सरकर

नई दिल्‍ली: इतिहास खुद को दोहराता है। रविवार को महाराष्‍ट्र की पॉलिटिक्‍स में यह बात सच साबित होती दिखाई दी। सत्‍ता की चाहत बहुत बेरहम होती है। इसमें रिश्‍ते बौने पड़ जाते हैं। भतीजे के हाथों राजनीति के दंगल में चित हुए से बेहतर भला इसके बारे में कौन जानता होगा। रविवार को शरद पवार के साथ जो हुआ उसने उन्‍हें 1978 की याद जरूर दिलाई होगी। शायद यही वजह है कि उन्‍होंने कहा कि बगावत उनके लिए नई चीज नहीं है। वह पार्टी को दोबारा खड़ा कर देंगे। रविवार को बगावत का बिगुल बजाने वाले उनके भतीजे अजित पवार थे। लेकिन, तब शरद पवार ने बड़ा उलटफेर किया था। रविवार को पूरे घटनाक्रम ने महाराष्ट्र में 1978 में वसंत दादा पाटिल सरकार के खिलाफ की याद ताजा कर दी। महाराष्ट्र में रविवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता अजित पवार समेत कुछ नेता मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नीत सरकार में शामिल हो गए। इस कदम ने 1978 की याद दिला दी। वह भी आज ही की तरह बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम था। तब शरद पवार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसंत दादा पाटिल की सरकार के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका था। शरद पवार लगभग 45 साल पहले कांग्रेस से बगावत करते हुए 40 विधायकों को लेकर अलग हो गए थे। इसके चलते पाटिल नीत तत्कालीन सरकार गिर गई थी। शरद पवार बन बैठे थे सीएम पवार ने 18 जुलाई 1978 को प्रगतिशील लोकतांत्रिक मोर्चा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसमें कई विपक्षी दल शामिल थे। वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश जोशी ने बताया कि 1978 में विधानमंडल सत्र चल रहा था। तत्कालीन गृह मंत्री नासिक राव तिरपुडे ने मुख्यमंत्री पाटिल को उद्योग मंत्री पवार से उनकी सरकार को खतरे के बारे में चेतावनी दी थी।जोशी ने याद किया, ‘वसंतदादा ने (तिरपुडे को) जवाब दिया कि शरद अभी मुझसे मिले थे। उसी दिन बाद में वसंतदादा ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।’ रविवार को घूम गया चक्र महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़े नाटकीय घटनाक्रम के तहत रविवार को राकांपा नेता अजित पवार पार्टी में विभाजन की स्थिति पैदा कर दी। वह राज्य सरकार में उपमुख्यमंत्री बन गए। इस कदम ने उनके चाचा शरद पवार को चौंका दिया। उन्‍होंने 24 साल पहले पार्टी की स्थापना की थी। दक्षिण मुंबई के राजभवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के आठ नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली।


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मद कबनट म फरबदल क अटकल तज आज पएम मद न बलई मटग

नई दिल्ली: रविवार एक ओर महाराष्ट्र में बड़ा सियासी उलटफेर हुआ तो वहीं दूसरी ओर मोदी कैबिनेट में जल्द फेरबदल की चर्चा तेज हो गई। पीएम मोदी सोमवार को ही दिल्ली के प्रगति मैदान में कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करेंगे। प्रगति मैदान में नवनिर्मित सम्मेलन कक्ष में होने की उम्मीद है जो सितंबर में जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। कैबिनेट विस्तार को लेकर यह चर्चा शुरू हो गई कि यह विस्तार सोमवार सुबह ही हो सकता है। इसके पीछे यह भी तर्क दिया गया कि राष्ट्रपति तीन जुलाई दोपहर 12 बजे से 7 जुलाई तक दिल्ली में मौजूद नहीं रहेंगी। इसलिए कैबिनेट विस्तार सोमवार या फिर 7 जुलाई के बाद संभव होगा। 20 जुलाई को मानसून सत्र शुरू होना है उससे पहले की चर्चा है। हाल ही में इसको लेकर पार्टी के भीतर एक बड़ी मीटिंग भी हुई। माना जा रहा है कि कुछ नए चेहरे इस कैबिनेट में शामिल हो सकते हैं। एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल, अकाली दल की हरसिमरत कौर को मोदी कैबिनेट में जगह मिलने की चर्चा शुरू है। BJP शीर्ष नेतृत्व की कई दौर की मीटिंग के बाद केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल की संभावना को लेकर जारी चर्चाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। यह बैठक आज यानी सोमवार को प्रगति मैदान में नवनिर्मित सम्मेलन कक्ष में होने की उम्मीद है, जो सितंबर में जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तीन से सात जुलाई के बीच कर्नाटक, तेलंगाना और महाराष्ट्र के दौरे पर रहेंगी और इस दौरान वह दो दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी। राष्ट्रपति भवन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति सोमवार को कर्नाटक के मुद्देनाहल्ली स्थित श्री सत्य साई यूनिवर्सिटी फॉर ह्यूमन एक्सीलेंस के दूसरे दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी। वह शाम को राज्य के राजभवन में पीवीटीजी (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों) के सदस्यों के साथ संवाद करेंगी। राष्ट्रपति भवन के अनुसार, चार जुलाई को राष्ट्रपति मुर्मू हैदराबाद में आयोजित अल्लुरी सीताराम राजू की 125वीं जयंती के समापन समारोह में हिस्सा लेंगी और वहां मौजूद लोगों को संबोधित करेंगी। राष्ट्रपति बुधवार को गोंडवाना विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करेंगी और नागपुर के कोराडी में भारतीय विद्या भवन के सांस्कृतिक केंद्र का भी उद्घाटन करेंगी। इसमें कहा गया कि राष्ट्रपति छह जुलाई को नागपुर स्थित राजभवन में पीवीटीजी के सदस्यों से संवाद करेंगी और महाराष्ट्र सरकार द्वारा उनके सम्मान में मुंबई स्थित राजभवन में आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में भी हिस्सा लेंगी।आगामी 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से पहले मोदी कैबिनेट में बदलाव का आखिरी मौका हो सकता है। इसलिए मंत्रिपरिषद में फेरबदल या विस्तार की संभावनाओं को और बल मिला है। सूत्रों ने कहा कि कुछ राज्यों सहित भाजपा के केंद्रीय संगठन में भी कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं क्योंकि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए प्रचार तेज करने में जुटा है।


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तम कर त सह हम कर त गलत... महरषटर क सयस उठपटक पर ओवस न कगरस क लतड

जयपुर: राजस्थान में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच एआईएमआईएम सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने जयपुर में महाराष्ट्र की सियासी उठापटक का जिक्र छेड़ नया बवाल खड़ा कर दिया। रविवार को जयपुर के रामलीला मैदान हुई रैली के दौरान ओवैसी ने एक तीर से दो निशाने किए। यहां ओवैसी ने कुर्सी को लेकर होने वाले सियासी दांव पेंच पर बीजेपी - कांग्रेस दोनों पार्टियों पर तीखा हमला बोला दिया। ओवैसी ने कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस बड़ी-बड़ी बातें कर रही है। क्या मुझे नजर नहीं आता कि आपकी पार्टी में क्या हो रहा है? उन्होंने आगे कहा कि आपकी पार्टी में कितने लोग तैयार बैठे हैं। कितने लोग मौके के इंतज़ार में हैं । हमसे भी बात करते हैं, मैंने कहा अभी रुक जाइए वक्त पर बताएंगे ।

विधायकों की खरीद - फरोख्त के मुद्दे पर की घेराबंदी

ओवैसी ने पटना में हुई विपक्ष की बैठक के मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि विपक्षी एकता की बैठक में शरद पवार जिसे लेकर आए थे प्रफुल्ल पटेल को , वे आज बीजेपी से जाकर मिल गए। इसके बावजूद कांग्रेस सेक्युलरिज्म का सर्टिफिकेट बांटती है। कांग्रेस अपने गिरेबान में झांककर देखें कि उन्होंने कैसे-कैसे धोखे दिए हैं। ओवैसी ने आगे कहा कि आज मीडिया में हर विपक्ष पार्टी का नेता रो रहा है कि बीजेपी ने NCP को तोड़ दिया। आज 40 विधायक चले गए तो ग़लत है और बिहार में हमारे 4 विधायकों को आपने खरीद लिया तो वह सही है?। तुम करो तो अच्छा और दूसरे करें तो ग़लत? गौरतलब है कि रविवार को महाराष्ट्र में एनसीपी नेता अजित पवार शिंदे सरकार के साथ चले गए। नौ एनसीपी विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। वहीं, अजित पवार को डिप्टी सीएम बनाया गया है।

UCC के मुद्दे पर पीएम मोदी पर साधा निशाना

ओवैसी ने जयपुर की रैली के दौरान पीएम मोदी पर भी जमकर हमला किया। यहां उन्होंने यूसीसी को लेकर भी बयान दिया। ओवैसी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी UCC की बात करते हैं , तब कोई भी कांग्रेस का नेता उसके खिलाफ कोई बात नहीं करता है। मैं तो अपने हिन्दू भाइयों से भी अपील करना चाहता हूं कि UCC कानून तो आपके विरोध में भी है तो आपको भी इसका विरोध करना चाहिए। ओवैसी ने आगे कहा कि पीएम मोदी देश को 2 मिनट में बनने वाले नूडल्स की तरह चलाना चाहते हैं। नरेंद्र मोदी के पास तो ऐसी डिग्री है जो किसी भी भारतीय के पास नहीं है। मैं तो नरेंद्र मोदी से बोलना चाहूंगा कि आप जुम्मे के दिन शराब की दुकानों को भी बंद करने की बात करें।


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NCP म द फड स टशन म पर वपकष... ममत सनय और नतश न शरद पवर स क फन पर बत

नई दिल्ली: एनसीपी के नेता अजित पवार के बगावती तेवरों से रविवार को ना केवल महाराष्ट्र की बल्कि देश की सियासत में भूचाल आ गया है।अजित पवार ने एनसीपी में दो-फाड़ कर दिए हैं और वह अपने 40 एनसीपी विधायकों के समर्थन के दावे के साथ महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम के तौर पर शपथ ले चुके हैं। लोकसभा चुनाव से पहले इतने बड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने विपक्षी दलों के नेताओं को भी अंदर तक हिला दिया है। जहां एक तरफ विपक्षी दल लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पस्त करने की रणनीति बनाने में व्यस्त हैं, ऐसे में एक विपक्षी दल के ही दो फाड़ हो जाना, विपक्ष के लिए शुभ संकेत नहीं है। विपक्षी दलों के सभी दिग्गज नेता अजित पवार की बगावत से सन्न हैं। सियासी घटनाक्रम के बाद सोनिया गांधी, राहुल गांधी, नीतीश कुमार, ममता बनर्जी और स्टालिन ने शरद पवार से बात की है। अजीत पवार ने शरद पवार को बहुत बड़ा झटका दिया है। उन्होंने एनसीपी से बगावत कर देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के साथ मिल गए। अजीत पवार अब एनडीए का हिस्सा हो गए हैं। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि, 'सीपीपी चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने शरद पवार से फोन पर बात की है और स्थिति पर चर्चा की है और उन्हें समर्थन दिया है, इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने शरद पवार से बात की थी।' वहीं, फेरबदल के कुछ घंटों बाद एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा, 'यह 'गुगली' नहीं है, यह डकैती है' और वह पार्टी छोड़ने वालों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

समझिए पूरा मामला

महाराष्ट्र में अजित पवार समेत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नौ नेताओं के रविवार को एकनाथ शिंदे नीत सरकार में शामिल होने पर पार्टी प्रमुख शरद पवार ने सत्तारूढ़ दल बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह घटनाक्रम कोई गुगली नहीं डकैती है। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे अजित पवार ने रविवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जबकि कुछ वरिष्ठ नेताओं सहित उनकी पार्टी के 8 विधायकों को शिवसेना-भाजपा सरकार में मंत्री के रूप में शामिल किया गया। घटनाक्रम पर संवाददाता सम्मेलन में शरद पवार ने कहा कि अजित पवार और राकांपा के अन्य विधायकों का शिंदे नीत सरकार में शामिल होना डकैती है। पवार ने कहा, ‘...यह गुगली नहीं, डकैती है। यह आसान चीज नहीं है। प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) ने पार्टी पर जो आरोप लगाए थे...अब (उन्होंने) उनमें से कुछ को आरोपों से दोषमुक्त करने का महत्वपूर्ण काम किया है।’


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गल थपथपय गल लग... घयल चदरशखर स मलकर आजम खन बल 'जक रख सइय मर सक न कय'

सहारनपुरः समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मंत्री ने रविवार को भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद से मुलाकात की और उनका हाल चाल जाना। हमले में घायल चंद्रशेखर से मिलने पहुंचे आजम खान ने उनका गाल सहलाया और फिर गले मिले। आजम खान ने कहा कि चंद्रशेखर से मिलने आए थे। उन्हें कुशल देख लिया और आज का मिशन पूरा हुआ। उन्होंने यूपी पुलिस तथा योगी सरकार पर तंज कसा और कहा कि जाको राखे साइयां मार सके न कोय।आजम खान चंद्रशेखर से मिलने के लिए सहारनपुर के छुटमलपुर पहुंचे थे। यहां उन्होंने मीडिया से भी बात की और कहा, 'मैं चंद्रशेखर आजाद की खैरियत लेने आया हूं। हमले से परेशान नहीं हूं क्योंकि ये पहला हमला नहीं है और ये आखिरी भी नहीं है। बस ये सेहतमंद रहें और जो मिशन है इनका गरीबों और कमजोरों को न्याय दिलाने का वो इनके जिंदगी के साथ मिशन भी जिंदा रहे। हमने इन्हें देख लिया, हमारा दिल खुश हो गया। हमारा आज का मिशन पूरा हो गया।' पुलिस पर आजम ने कसा तंजप्रदेश की पुलिस के बारे में सवाल पूछे जाने पर आजम खान ने कहा, 'मेरे ऊपर ढाई सौ मुकदमें हैं। मैं चौथी बार जब मंत्री था, जेड सिक्योरिटी थी, उस वक्त मेरी बीवी असोसिएट प्रफेसर थी। तब हमारे पर ये मुकदमा है कि हम मियां-बीवी ने एक शराब की दुकान लूटी। शराब की बोतलें लूटीं और 16 हजार 900 रुपये गल्ले से डाका मारी। मुर्गियां चुराई नहीं, हमने मुर्गियों का डाका किया। बकरियां, भैसें, अलमारियां, किताबें। अब आप ऐसे व्यक्ति से पुलिस के बारे में पूछोगे तो वो तारीफ ही करेगा। योगी सरकार पर तीखा निशानाप्रदेश की सरकार क्या कानून व्यवस्था में फेल हो गई है? के सवाल पर आजम खान ने तंज कसते हुए कहा कि फेल कौन सा वाला है? कंपार्टमेंट आई है या सारे सब्जेक्ट में फेल है? कंपार्टमेंट अगर आती है तो प्रमोशन मिल जाता है। आप पहले ये तय करो कितने सब्जेक्ट में फेल है सरकार? और जाको राखे साइयां मार सके न कोय। बचाने वाले भी कभी... जो आज सत्ता चला रहे हैं उनका इतिहास भी मालूम है न?


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Saturday, July 1, 2023

हगमदर हग मनसन सतर! सरकर क घरन क लए तयर वपकष इन 7 बल पर हग फकस

Parliament Monsoon Session 2023: संसद का मानसून सत्र इस बार हंगामेदार रहने की पूरी संभावना है. मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त तक चलेगा. इसमें कुल 15 बैठकें होने की संभावना है. सरकार ने आगामी सत्र के दौरान पारित होने वाले कई विधेयकों को सूचीबद्ध किया है, जिसके काफी हंगामेदार होने की उम्मीद है.

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तजसव क दबव म फसल लन क मजबर नतश कमर! सवसथय वभग तबदल आदश वपस पर उठ सवल

पूर्णिया: बिहार के सियासी गलियारे में सीएम को लेकर पिछले दो-तीन दिनों से तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। उनका अचानक राज्यपाल से मिलना, संयोगवश सुशील कुमार मोदी का उसी वक्त राजभवन पहुंचना और उसके बाद अपनी पार्टी जेडीयू के विधायकों-पार्षदों से वन टू वन मिलना चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। चर्चा हो रही है कि विपक्षी एकता मुहिम का अगुआ बनने से नीतीश के आधार वोट पर चोट पहुंच सकती है। वे एनडीए में लौटने की संभावना टटोल रहे हैं। आरजेडी का दबाव नीतीश कुमार पर इतना बढ़ गया है कि वे अब असहज महसूस करने लगे हैं। इन चर्चाओं का लोग आधार भी बता रहे हैं।

नीतीश को हो रहा गलती का एहसास

नीतीश कुमार को अब एहसास होने लगा है कि बीजेपी का साथ छोड़ कर उन्होंने फिर गलती कर दी है। पिछली बार महागठबंधन से अलग होने का उन्होंने कारण तेजस्वी के खिलाफ सीबीआई में दर्ज केस को बताया था। लेकिन सच यह था कि उन पर आरजेडी का दबाव बढ़ गया था। सरकार के हर फैसले में आरजेडी टांग अड़ाता था। नीतीश की असली अकुलाहट तब इसी वजह से अधिक थी। इसके बावजूद उन्होंने दोबारा महागठबंधन के साथ जाने की गलती कर दी। इस बार भी उनके सामने वही स्थिति पैदा हो गई है। उन्हें अपने ही फैसले पलटने पड़ रहे हैं। नीतीश को अब अपनी चूक का एहसास भी होने लगा है।

स्वास्थ्य विभाग के तबादले रोकने पड़े

डेप्युटी सीएम तेजस्वी यादव के जिम्मे ही बिहार का स्वास्थ्य महकमा है। वे इन दिनों विदेश यात्रा पर हैं। उनकी गैरमौजूदगी में राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के 9 संवर्गों के 500 से अधिक कर्मियों का तबादला अचानक कर दिया। आश्चर्य तब हुआ कि 24 घंटे के अंदर तबादले का आदेश रद्द करना पड़ा। न सिर्फ फैसला रद्द करना पड़ा, बल्कि तबादले में नियमों की अनदेखी की बात कह कर जांच कमेटी भी बना दी गई है। स्वास्थ्य निदेशक राकेश चन्द्र सहाय वर्मा ने तबादला सूची शाम को जारी की थी। तबादले के फैसले को उनके ओएसडी ने अगली सुबह रद्द कर दिया। कहा गया कि जिनके तबादले हुए हैं, नियम के मुताबिक उनका ट्रांसफर किया ही नहीं जा सकता। अब इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है।

तबादले रद्द होने जाने से अटकलें

तबादले का आदेश रद्द होने को तेजस्वी की नाराजगी से जोड़ कर देखा जा रहा है। चर्चा है कि नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बीच संबंध इस हद तक पहुंच चुके हैं कि नीतीश को दबाव में बैकफुट पर आना पड़ा है। दो दिन पहले 9 संवर्ग के 500 से अधिक कर्मचारियों का तबादला किया गया था। अब कहा जा रहा है कि इसमें नियमों की अनदेखी की गई थी। यह पता चलते ही अपर सचिव स्तर से तबादले के आदेश को रद्द कर दिया गया।रिपोर्ट- ओमप्रकाश अश्क


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