पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: भाटपाड़ा का नाम 'भट्टा-पल्ली' से जुड़ा है, जो ब्राह्मण संस्कृत विद्वानों की बस्ती थी. यहां पारंपरिक 'टोल' स्कूल संस्कृत शिक्षा के लिए प्रसिद्ध थे. 1899 में नैहाटी से अलग होकर नगर पालिका बनी. ब्रिटिश काल और आजादी के बाद जूट मिलों के कारण यह इंडस्ट्रियल हब बना. जूट प्रोसेसिंग ने बाहर से बड़ी संख्या में मजदूरों को आकर्षित किया, जिनमें हिंदी भाषी समुदाय प्रमुख है.
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