Wednesday, November 6, 2024

20 रन बनाने में गिर गए 10 विकेट, इस भारतीय टीम के 9 बल्लेबाज दहाई तक नहीं पहुंच सके

शिलांग: रणजी ट्रॉफी ग्रुप ए एलीट वर्ग में के खिलाफ मेघालय की टीम का बुरा हाल हो गया। मैच में मेघालय की टीम को टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी का मौका था। मेघालय के लिए ओपनर बल्लेबाड बामनभा शेंगप्लियांग और अर्पित भटेवरा ने सधी हुई शुरुआत की थी, लेकिन शेंगप्लियांग 53 रन के स्कोर पर आउट हो गए।ऐसा लगा कि शेंगप्लियांग के बाद अर्पित पारी को संभालने का काम करेंगे, लेकिन वे भी 24 रन बनाकर आउट हो गए। बैक टू बैक दो विकेट गिरने के बाद मेजबान मेघालय की हालत खराब हो गई थी। यहां से टीम को एक अच्छी पार्टनरशिप की जरूरत थी, लेकिन जम्मू कश्मीर के गेंदबाजों ने ऐसा होने ही नहीं दिया।73 रन के स्कोर पर मेघालय ऑल आउट जम्मू-कश्मीर के खिलाफ जब मेघालय की पारी शुरू हुई थी तो टीम ने 2 विकेट के नुकसान पर 56 रन बना लिए थे। ऐसा लग रहा था कि मेघालय की टीम यहां से वापसी कर लेगी, लेकिन टीम की 20 रन बनाने में हालत खराब हो गई और पूरी टीम 73 रन के स्कोर सिमट गई। इस दौरान मेघालय के पांच बल्लेबाज ऐसे जो अपना खाता तक नहीं खोल पाए। वहीं 9 खिलाड़ी ऐसे रहे जो दहाई के आंकड़े को भी छूने में सफल नहीं रहे।आकिब और आबिद ने ढाया कहर गेंदबाजी में जम्मू-कश्मीर के लिए आकिब नबी और आबिद मुश्ताक ने अपना कहर बरपाया। इन दोनों गेंदबाजों ने अपनी टीम के लिए पंजा खोला। आकिब नबी ने 14 रन देकर पांच विकेट झटके जबकि आबिद मुश्ताक ने 19 रन देकर इतने ही विकेट अपने नाम किए।मेघालय को सिर्फ 73 रन के स्कोर पर समेटने के बाद जम्मू-कश्मीर ने बल्लेबाजी भी कुछ खास नहीं रही है। टीम ने सिर्फ 125 रन के स्कोर अपने 6 विकेट गंवा दिए। ऐसे में उसे पहली पारी में 52 रन की बढ़त हासिल हुई है। मेघालय के लिए गेंदबाजी में आकाश कुमार (39 रन तीन विकेट) ने मेजबान टीम को वापसी दिलाने की कोशिश की है।


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Tuesday, November 5, 2024

कानपुर के इन तीन हाइवे पर प्रति किलोमीटर देना होगा टोल टैक्स, नई व्यवस्था के बारे में जान लीजिए

कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में अब एक्सप्रेसवे की तर्ज पर नेशनल हाईवे पर भी प्रति किलोमीटर के हिसाब से टोल टैक्स की व्यवस्था लागू होगी। नेशनल हाईवे पर आप अपने वाहन को जितनी दूर तक लेकर जाएंगे, उतना ही टोल देना पड़ेगा। प्रति किलोमीटर के हिसाब से टोल अदा करने की एनएचएआई की योजना पहले चरण में अप्रैल 2025 तक हाइब्रिड सिस्टम से लागू होगी। इस योजना में देश के प्रमुख हाईवे शामिल किए गए हैं। हालांकि, टोल प्लाजा भी पूर्व की तरह चलते रहेंगे। कानपुर क्षेत्र में प्रयागराज, अलीगढ़ और उन्नाव-लालगंज हाईवे को इस प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है।हाइवे पर प्रति किलोमीटर के हिसाब से टोल टैक्स वसूली को लेकर प्रक्रियाओं को पूरा कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। तीनों हाइवे का पूरा डेटा ग्लोबल नेवीगेशन सेटेलाइट सिस्टम (GNSS) पर डाला जा रहा है। दूरी, टोल प्लाजा, गुजरने वाले वाहन और चढ़ने-उतरने की सर्विस लेन कनेक्टिविटी से लेकर पूरा मैप जीएनएसएस पर होगा।

टोल प्लाजा खत्म करने की है योजना

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से इस सिस्टम को लागू किया जा रहा है। इस सिस्टम के लागू होने के बाद धीरे-धीरे टोल प्लाजा खत्म किए जाएंगे। योजना के तहत हाइवे पर सफर करने के दौरान कोई वाहन 24 घंटे में 20 किलोमीटर तक सफर करता है तो उसे टोल टैक्स नहीं देना होगा।

क्या है वर्तमान व्यवस्था?

वर्तमान व्यवस्था के तहत दो टोल के बीच कोई वाहन सफर करता है तो उसे शुल्क नहीं देना पड़ता है। इसका अर्थ यह हुआ कि एक टोल से दूसरे टोल की न्यूनतम दूरी 60 किलोमीटर होती है। ऐसे में कोई फास्टैग लगा वाहन टोल प्लाजा से नहीं गुजरता है तो उसे पैसा नहीं देना होता है। हालांकि, प्रति किलोमीटर टोल व्यवस्था में 20 किलोमीटर से अधिक का सफर करने पर टोल टैक्स देना होगा। हाइब्रिड सिस्टम के तहत फास्टैग से भी टोल कटेगा।

वाहनों में ओबीयू जरूरी

जीएनएसएस के तहत टोल देने के लिए वाहनों में एबीयू यानी ऑन बोर्ड यूनिट लगवाना होगा। नए वाहनों में फैक्ट्री फिटेड ओबीयू होगा। अभी शोरूम मालिक अपने परिसर से बाहर निकलने वाली नई कारों में जिस तरफ फास्ट्रेक स्टिकर लगवाते हैं, वैसे ही ओबीयू लगवाएंगे। जैसे ही जीएनएसएस वाहन टोल गेट से गुजरेगा, उसे एक पिंग प्राप्त होगा।इस पिंग में वाहन चालक को दूरी, समय और टिकट मिलेगा। ओबीयू के जरिए फास्ट्रेक की तरह इलेक्ट्रॉनिक भुगतान होगा। इससे वाहन चालकों को अधिक परेशानी नहीं होगी।

एनएचएआई ने दी जानकारी

एनएचएआई के परियोजना निदेशक अमन रोहिला ने बताया कि एनएचएआई पहले चरण में टोल प्लाजा के साथ सेटेलाइट के माध्यम से टोल भुगतान की सुविधा शुरू करने जा रहा है। कानपुर के तीनों हाइवे की पूरी जानकारी हाइब्रिड सिस्टम पर डालने के लिए मुख्यालय को भेज दी गई है। एक्सप्रेसवे की तर्ज पर जितनी दूरी वाहन तय करेगा, उसे उतना ही टोल देना होगा।


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Monday, November 4, 2024

योगी जी का बुलडोजर क्यों नहीं आया अब तक... ताइक्वांडो प्लेयर अनुराग हत्याकांड, छोटी बहन ने किया सवाल

जौनपुर: उत्तर प्रदेश के जौनपुर में ताइक्वांडो खिलाड़ी अनुराग यादव की हत्या का मामला गरमाता जा रहा है। परिजनों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर खासी नाराजगी है। परिजन स्थानीय एसओ पर ढिलाई बरतने का आरोप लगा रहे है। मृतक अनुराग यादव के परिजनों का कहना है कि तलवार से हमारे बच्चे का सिर काट दिया गया, लेकिन अभी भी कई कातिल फरार हैं। परिवार के लोगों ने मर्डर केस में डीएम से मुलाकात की है। उन्हें घटना के बारे में जानकारी दी। डीएम ने पीड़ित परिजनों को कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस दौरान मृतक की छोटी बहन का बयान सामने आया है। छोटी बहन ने कहा है कि पुलिस कहती थी, जमीन विवाद में मारपीट और खून-खराबा होगा। इसके बाद भी समय पर एक्शन नहीं लिया गया। साथ ही, हत्या आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन की भी मांग उसने कर डाली।

छोटी बहन ने क्या कहा?

मृतक अनुराग यादव की छोटी बहन स्वाति जब मीडिया के सामने आई तो उसकी भावनाएं सामने आ गई। उसने कहा कि जब भी जमीन के विवाद की शिकायत करने हम थाने जाते थे, थाना प्रभारी कहते थे कि अहीर बिरादरी है। बिना मारपीट और खून-खराबे के मानेंगे नहीं और वैसा ही हुआ। मामला थाना गौराबादशाहपुर के कबीरुद्दीनपुर का है। यहां जमीन विवाद में 17 वर्षीय किशोर अनुराग यादव की हत्या कर दी गई। इस मामले में रिटायर दरोगा लालता यादव और उसके बेटे रमेश यादव पर हत्या का आरोप लगा है।स्वाति ने भाई की हत्या मामले में कहा कि पूरी प्लानिंग के साथ मेरे भाई को मारा गया। लेकिन, कोई कुछ नहीं कर रहा है। हमारी नाराजगी सबसे है। पुलिस, प्रशासन से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ तक से उसने नाराजगी जाहिर की। स्वाति ने सवाल किया कि मेरे भाई के सिर को धर से अलग कर दिया गया। आज योगी जी का बुलडोजर कहां है? क्यों नहीं उन आरोपियों पर बुलडोजर चला?

30 अक्टूबर को हुई थी घटना

जौनपुर के गौराबादशाहपुर थाना क्षेत्र के कबीरूद्दीनपुर गांव में 30 अक्टूबर की सुबह ताइक्वांडो प्लेयर अनुराग यादव की तलवार से काटकर हत्या का मामला सामने आया। पूरा मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है। तलवार के हमले में अनुराग का सिर उसके धड़ से अलग हो गया था। हत्याकांड के खौफनाक मंजर को देखकर हर कोई हैरान रह गया था। अब इस मामले में परिजनों ने डीएम से मुलाकात के क्रम में पुलिस के एक्शन पर सवाल उठाए हैं।स्थानीय एसओ पर उचित एक्शन न लिए जाने का आरोप मृतक के परिजनों की ओर से लगाया जा रहा है। परिवार के लोगों का आरोप है कि एसओ राजाराम द्विवेदी सही तरीके से कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। पिछले 6 दिनों से उन्हें आश्वासन ही मिल रहा है, लेकिन मामले में सटीक एक्शन नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि स्थानीय थाना क्षेत्र के दारोगा की कार्रवाई से बिल्कुल संतुष्ट नहीं है।

बेटे को बताया बेकसूर

अनुराग के परिवार के लोगों ने कहा कि क्या यहां जंगलराज चल रहा है। हमार लड़के का सिर काट दिया गया। वह बिल्कुल बेकसूर था। दरअसल, अनुराग हत्याकांड में अब तक 4 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। अभी भी दो लोग फरार चल रहे हैं। मृतक अनुराग के पिता रामजीत यादव का कहना है कि आरोपियों के घर से हथियार बरामद हुए हैं। इससे साफ पता चलता है कि उन लोगों ने वारदात को अंजाम देने की पूरी तैयारी की हुई थी।

एसओ पर उठाए सवाल

मृतक अनुराग की बहन स्वाति भी एसओ राजाराम द्विवेदी पर नाराजगी दिखा रही है। उसका कहना है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी वह मुस्कुराते हुए आते हैं और चले जाते हैं। भाई की हत्या मामले में हमने आरोपी राजकुमार के खिलाफ तहरीर देनी चाही तो वह कहने लगे, हम समझ लेंगे। सही तरीके से एक आवेदन नहीं लिया जा रहा है। ऐसे में हम इस पुलिस अधिकारी से अधिक उम्मीद नहीं रख सकते हैं।इस मामले में अब तक मुख्य आरोपी रमेश यादव, रमेश यादव का भाई मेरठ में दारोगा राजेश यादव, पिता लालता यादव और एक नाबालिग को अरेस्ट किया गया है। वहीं, जमीन विवाद में हत्या को लेकर लापरवाही के आरोप में लेखपाल जगदीश यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। घटना की मजिस्ट्रियल जांच के लिए अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को नामित किया गया है।


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Sunday, November 3, 2024

भाई दूज पर मैनग्रोव संरक्षण का अनोखा प्रयास, पेड़ को टीका लगाकर की पूजा

Bhai Phonta: सागर द्वीप में महिलाओं ने भाई दूज पर मैनग्रोव पेड़ों को नई साड़ी पहनाई, चंदन का टीका लगाया और गीत गाए. इस अनोखे आयोजन में मैनग्रोव संरक्षण का संदेश देते हुए जागरूकता बढ़ाने के लिए रैली भी निकाली.

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भारत-चीन सीमा से सैनिकों की वापसी पर क्या बोले जयशंकर, यूक्रेन-इजरायल मुद्दे पर रखा देश का पक्ष

ब्रिस्बेन: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को कहा कि भारत और चीन ने सैनिकों को पीछे हटाने की दिशा में ''कुछ प्रगति'' की है। उन्होंने इस घटनाक्रम को ''स्वागत योग्य'' कदम बताया। जयशंकर की यह टिप्पणी पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गतिरोध वाले दो बिंदुओं-डेमचोक और देपसांग में भारतीय और चीनी सैनिकों के पीछे हटने के कुछ दिनों बाद आई है। भारतीय सेना ने देपसांग में सत्यापन गश्त शनिवार को शुरू की, जबकि डेमचोक में गश्त शुक्रवार को शुरू हुई थी।

जयशंकर ने ब्रिस्बेन में क्या कहा

जयशंकर ने ब्रिस्बेन में प्रवासी भारतीय समुदाय के लोगों के साथ बातचीत के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा, ''भारत और चीन के संदर्भ में हमने कुछ प्रगति की है। आप जानते हैं कि हमारे संबंध कुछ कारणों से बहुत ही खराब थे। हमने (सैनिकों के) पीछे हटने की दिशा में कुछ प्रगति की है।''

सैनिकों की तैनाती से कई पहलू प्रभावित

विदेश मंत्री ने कहा, ''वास्तविक नियंत्रण रेखा के आसपास बहुत बड़ी संख्या में चीनी सैनिक तैनात हैं, जो 2020 से पहले वहां नहीं थे और बदले में हमने भी जवाबी तैनाती की। इस अवधि के दौरान संबंधों के अन्य पहलू भी प्रभावित हुए हैं। इसलिए स्पष्ट रूप से, हमें पीछे हटने के बाद देखना होगा कि हम किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।''

मोदी-जिनपिंग मुलाकात को सराहा

जयशंकर ने कहा, ''लेकिन, हमें लगता है कि पीछे हटना एक स्वागत योग्य कदम है। इससे यह संभावना खुलती है कि अन्य कदम भी उठाए जा सकते हैं।'' उन्होंने कहा कि पिछले महीने रूस में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद उम्मीद थी कि ''राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) और मैं दोनों अपने समकक्षों से मिलेंगे। तो चीजें इस तरह हुई हैं।''

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने दी थी समझौते की जानकारी

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 21 अक्टूबर को दिल्ली में कहा था कि पिछले कई हफ्तों की बातचीत के बाद भारत और चीन के बीच एक समझौते को अंतिम रूप दिया गया है, जिससे 2020 में उठे मुद्दों का समाधान निकलेगा। पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर सैनिकों को पीछे हटाने और गश्त करने पर सहमति बनी, जो चार साल से जारी गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी सफलता है। जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई भीषण झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में गिरावट आई थी।

दो देशों की यात्रा में ब्रिस्बेन पहुंचे हैं जयशंकर

दो देशों की अपनी यात्रा के पहले चरण में आस्ट्रेलिया के शहर ब्रिस्बेन पहुंचे जयशंकर ने कहा कि इस समय दो संघर्षों पर हर किसी की नजरें टिकी हुई हैं। उन्होंने एक अन्य सवाल पर कहा, ''एक यूक्रेन है। और दूसरा पश्चिम एशिया में जो हो रहा है। अलग-अलग तरीकों से हम दोनों में कुछ करने का प्रयास कर रहे हैं।''

यूक्रेन-रूस संघर्ष पर क्या बोले जयशंकर

यूक्रेन-रूस संघर्ष पर जयशंकर ने कहा कि भारत कूटनीति पर फिर से जोर दे रहा है, तथा प्रधानमंत्री मोदी व्यक्तिगत रूप से दोनों देशों के नेताओं के साथ बैठकों में शामिल रहे हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जुलाई में रूस गए थे और फिर अगस्त में यूक्रेन गए। प्रधानमंत्री ने जून में और सितंबर में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की। पिछले महीने प्रधानमंत्री मोदी ने कजान में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फिर से बैठक की थी।

संघर्ष के कारण पूरी दुनिया को नुकसान

जयशंकर ने कहा कि संघर्ष के कारण, हर दिन रूस और यूक्रेन तथा अमीर देशों के अलावा दुनिया को भी नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा, ''इसलिए, यह ऐसी स्थिति है, जिसमें कुछ हद तक सक्रियता या सक्रिय कूटनीति की आवश्यकता है। हम ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ''जब हमने यह करना शुरू किया, तो ईमानदारी से कहूं तो एक हद तक संशय था। मैं कहूंगा कि आज, खासकर पश्चिमी देशों के बीच, काफी समझ है...हमारे प्रयासों के लिए हमें 'ग्लोबल साउथ' से भी बहुत मजबूत समर्थन मिल रहा है। इसलिए, हम उम्मीद कर रहे हैं कि कई बातचीत के माध्यम से, हम कुछ साझा आधार बनाने में सक्षम होंगे...।''

ग्लोबल साउथ का किया जिक्र

'ग्लोबल साउथ' का संदर्भ कम आय वाले देशों या विकासशील देशों के लिए किया जाता है। पश्चिम एशिया की स्थिति पर जयशंकर ने कहा कि वहां की स्थिति बहुत अलग है। उन्होंने विस्तृत जानकारी दिए बिना कहा, ''फिलहाल, संघर्ष को फैलने से रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। यहां एक अंतर यह है कि ईरान और इजराइल एक-दूसरे से सीधे बात करने में असमर्थ हैं। इसलिए विभिन्न देश यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या वे इस अंतर को पाट सकते हैं। हम उनमें से एक हैं।''

पश्चिम एशिया में शांति पर भारत का जोर

पिछले महीने रूस में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात की, जिन्होंने पश्चिम एशिया में शांति की आवश्यकता पर बल दिया तथा ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच सभी पक्षों के साथ अच्छे संबंधों के कारण संघर्ष को कम करने में भारत की भूमिका पर जोर दिया।

क्वाड पर भी दिया बयान

'क्वाड' के बारे में उन्होंने कहा कि चार सदस्यीय समूह का उद्देश्य बड़ा है। उन्होंने भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के समूह का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें चार बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश हैं। इन सभी देशों ने काम करने के लिए एक साझा एजेंडा बनाया है। उन्होंने कहा, ''मेरा मतलब है कि क्वाड कई काम करता है। कनेक्टिविटी और जलवायु पूर्वानुमान से लेकर फेलोशिप तक। इसलिए इसके तहत कई गतिविधियां होती हैं।''


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Saturday, November 2, 2024

दुनिया के सबसे बड़े 'कैदी' मगरमच्छ कैसियस की ऑस्ट्रेलिया में मौत, लंबाई दो मंजिले घर के बराबर

सिडनी: ऑस्ट्रेलिया में दुनिया के सबसे बड़े कैदी मगरमच्छ की मौत हो गई है। इस मगरमच्छ को कैसियस नाम दिया गया था। कैसियर की लंबाई 5.48 मीटर (18 फीट) थी। इसके नाम इंसानों की कैद में मौजूद सबसे बड़े मगरमच्छ का विश्व रेकॉर्ड था। शनिवार को ऑस्ट्रेलियाई वन्य जीव अभ्यारण्य ने इस विशालकाय पालतू मगरमच्छ की मौत की पुष्टि की। माना जा रहा है कि उसकी उम्र 110 साल से ज़्यादा थी।

अभ्यारण्य बोला- कैसियस की याद आएगी

मैरिनलैंड मेलानेशिया क्रोकोडाइल हैबिटेट ने फेसबुक पर बताया कि कैसियस का वजन एक टन से ज्यादा था और 15 अक्टूबर से ही उसकी सेहत में गिरावट आ रही थी। क्वींसलैंड के पर्यटक शहर केर्न्स के पास ग्रीन आइलैंड पर स्थित संगठन की एक पोस्ट के अनुसार, "वह बहुत बूढ़ा था और माना जा रहा था कि वह जंगली मगरमच्छ से ज़्यादा उम्र तक जी रहा था।" वन्य जीव अभ्यारण्य ने कहा, "कैसियस की बहुत याद आएगी, लेकिन उसके प्रति हमारा प्यार और यादें हमेशा हमारे दिलों में रहेंगी।"

1987 से अभ्यारण्य में था कैसियस

समूह की वेबसाइट ने कहा कि वह 1987 से ही इस अभ्यारण्य में रह रहा था। उसे पड़ोसी उत्तरी क्षेत्र से लाया गया था, जहां मगरमच्छ इस क्षेत्र के पर्यटन उद्योग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कैसियस, एक खारे पानी का मगरमच्छ था। उसके नाम कैद में दुनिया के सबसे बड़े मगरमच्छ के रूप में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का खिताब था। गिनीज के अनुसार, उसने फिलीपींस के मगरमच्छ लोलोंग की 2013 में मृत्यु के बाद यह खिताब जीता था, जिसकी लंबाई 6.17 मीटर (20 फीट 3 इंच) थी।


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Friday, November 1, 2024

तीन मुस्लिम युवक साधु बनकर मांग रहे थे भीख, गाजीपुर पुलिस ने दर्ज किया केस, जांच में मऊ के रहने वाले निकले

अमितेश सिंह, गाजीपुर: के गाजीपुर में तीन मुस्लिम साधु बनकर घुमने के दौरान पकड़े गए। कासिमाबाद बाजार में शुक्रवार को उस समय अफरातफरी मच गई जब जोगी-साधु के नकली रूप में भिक्षा मांगने का आरोप कुछ लोगों पर लगा। ग्रामीणों ने शंका के आधार पर तीन लोगों को पुलिस को सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने 3 लोगों को हिरासत में लिया है। पूछताछ में तीनों मुस्लिम समुदय के निकले। कासिमाबाद कोतवाली थाना क्षेत्र के सुकहां बाजार में तीन जोगी साधुओं को फेरी करते हुए ग्रामीणों ने देखा। बातचीत के आधार पर लोगों को उनके गैर धर्म से संबंधित होने का शंका हुआ। कुछ लोगों ने उनकी रेकी करना शुरू कर दिया। थोड़ी देर में ही स्थानीय लोगों में से कुछ ने बताया कि साधु के रूप में भिक्षा मांग रहे तीनों के हैं।

तीनों मुस्लिम समुदाय के निकले

लोगों ने कासिमाबाद पुलिस को सूचित किया। मौके पर लोगों की भीड़ एकत्र होने लगी। ग्रामीण ने तुरंत पुलिस को मौके पर बुलाया और तीनों को पुलिस के हवाले कर दिया। पकड़े गए तीन लोगों का नाम सोहराब खान, शहजाद खान और नियाद बताया जा रहा है। सभी लोग मऊ जनपद के दोहरीघाट थाना क्षेत्र के अतरसांवा गांव के निवासी बताए जा रहे हैं।

तीनों के खिलाफ केस दर्ज

प्रभारी निरीक्षक कासिमाबाद महेंद्र सिंह ने बताया कि पूछताछ के दौरान पता चला, पिछली कई पीढियों से उनके परिवार में लोग जोगी-साधु बनकर भिक्षा मांगने का काम करते आ रहे हैं। इसमें वह लोग किसी प्रकार का साजिश नहीं करते। उन्होंने यह भी बताया कि दोहरीघाट कोतवाली से संपर्क कर इन सबके पारिवारिक पृष्ठभूमि की गहनता से जांच की जा रही है। वहीं सुकहां के रहने वाले शिवजी गुप्ता ने तीनों फर्जी साधुओं के खिलाफ कासिमाबाद कोतवाली में लिखित प्रार्थना पत्र देकर मुकदमा दर्ज कराया है।


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