Tuesday, January 24, 2023

Gorging and Gagging on the Beauty


By BY GUY TREBAY from NYT Style https://ift.tt/4VWXbBM

वकीलों की हड़तालें: सुप्रीम कोर्ट ने BCI को लगाई फटकार, कहा- नियम कड़े करें

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने वकीलों की अक्‍सर होने वाली हड़तालों पर काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को फटकार लगाई और उसे पेशेवर शिष्टाचार के नियम कड़े करने को कहा.

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तबाही के और करीब पहुंची दुनिया, डूम्सडे क्लॉक में 10 सेकेंड कम हुआ, भविष्यवाणी जान लीजिए

न्यूयॉर्क: वैज्ञानिकों ने को लेकर बड़ा ऐलान किया है। दुनियाभर में जंग के हालात को देखते हुए शीर्ष परमाणु वैज्ञानिकों ने तीन साल में पहली बार इस घड़ी में 10 सेकेंड समय कम किया है। इन शीर्ष परमाणु वैज्ञानिकों के अनुसार, अब दुनिया तबाह होने से सिर्फ 90 सेकेंड की दूरी पर है। इस घड़ी में आधी रात का का वक्त होने में जितना कम समय रहेगा दुनिया में परमाणु युद्ध का खतरा उतना ही करीब होगा। 1947 से ही काम कर रही यह घड़ी बताती है कि दुनिया महाविनाश से कितनी दूर खड़ी है। अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में सालाना डूम्सडे क्लॉक की घोषणा करते हुए वैज्ञानिकों ने कहा कि पूरी दुनिया पर तबाही के कगार पर खड़ी है।

तीन साल बाद घड़ी में बदला गया समय

बुलेटिन ऑफ़ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स (बीएएस) ने डूम्सडे क्लॉक की घोषणा करते हुए कहा कि यूक्रेन पर रूस का जारी आक्रमण, कोविड महामारी, जलवायु संकट और जैविक खतरे सबसे बड़े संकट बने हुए हैं। शीत युद्ध के चरम के दौरान भी डूम्सडे क्लॉक कभी भी तबाही के इतनी ज्यादा नजदीक नहीं पहुंची है। पिछले तीन साल से इस घड़ी की सुई आधी रात से 100 सेकेंड की दूरी पर रुकी हुई थी। तब बताया जा रहा था कि खतरा 100 सेकेंड पर ही रुका हुआ है। लेकिन, इस बाद यूक्रेन युद्ध में बढ़ते जोखिमों के कारण तबाही के एक कदम और करीब आ गया है।

वैज्ञानिक बोले- हम अभूतपूर्व खतरे का सामना कर रहे

बीएएस के अध्यक्ष और सीईओ राहेल ब्रॉनसन ने कहा कि हम अभूतपूर्व खतरे के समय में रह रहे हैं। कयामत के दिन की घड़ी का समय उस वास्तविकता को दर्शाता है। 90 सेकंड तक की दूरी आधी रात से अब तक सबसे करीब है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा निर्णय है जिसे हमारे विशेषज्ञ हल्के में नहीं लेते हैं। अमेरिकी सरकार, उसके नाटो सहयोगियों और यूक्रेन के पास बातचीत के लिए कई चैनल हैं। हम नेताओं से आग्रह करते हैं कि वे घड़ी को पीछे करने की पूरी क्षमता से उन सभी का पता लगाएं।

कैसे मापा जाता है खतरे का स्तर

डूम्सडे क्लॉक के लिए खतरे का स्तर कई पैमानों पर मापा जाता है। इसका आंकलन युद्ध, हथियारों, जलवायु परिवर्तन, विध्वंसकारी तकनीक, प्रॉपगैंडा वाले वीडियो और अंतरिक्ष में हथियारों की तैनात की कोशिश जैसे वैश्विक हलचल से मापी जाती है। त युद्ध की समाप्ति पर 1991 में यह घड़ी मध्यरात्रि यानी विनाश से सबसे अधिक 17 मिनट की दूरी पर थी। डूम्सडे क्लॉक एक सांकेतिक घड़ी है जो मानवीय गतिविधियों के कारण वैश्विक तबाही की आशंका को बताती है। इस घड़ी में मध्यरात्रि 12 बजने को भारी तबाही का संकेत माना जाता है। 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी में हुए हमले के बाद वैज्ञानिकों ने मानव निर्मित खतरे से विश्व को आगाह करने के लिए इस घड़ी का निर्माण किया गया था।


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F.D.A. Proposes Limits for Lead in Baby Food


By BY CHRISTINA JEWETT from NYT Health https://ift.tt/h3tvD89

Monday, January 23, 2023

'क्यों न सभी आरोपियों को जमानत दे दें', जानिए किस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को सुनाया

दिल्ली/पटना: ने बिहार शराबबंदी और आबकारी अधिनियम से जुड़े एक और मामले की सुनवाई हुई। इसके तहत आने वाले मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों को इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया नहीं कराने पर नाराजगी जाहिर की। इसे स्थापित करने में सात साल की देरी पर नाराजगी जताई। उच्चतम न्यायालय ने सवाल किया कि क्यों नहीं सरकार अदालतों के लिए अपनी इमारतें खाली कर देती?

बिहार सरकार पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अधिनियम की धारा-37(2) के तहत राज्य की ओर से न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियों को कार्यकारी मजिस्ट्रेट को देने पर भी चिंता जताई, जिसको लेकर पटना उच्च न्यायालय ने भी आपत्ति जताई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि वो शराबबंदी अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए जरूरी सुविधाएं मुहैया करने से लेकर कार्यकारी मजिस्ट्रेट को शक्तियां हस्तांतरित करने सहित सभी पहलुओं पर विचार करेगी।न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति अभय एस ओका ने कहा कि कानून को 2016 में पारित किया गया लेकिन अबतक विशेष अदालतें गठित करने के लिए जमीन तक चिह्नित नहीं की गई है। पीठ ने हैरानी जताई कि क्यों नहीं शराबबंदी अधिनियम के तहत आरोपित सभी आरोपियों को इन मामलों की सुनवाई के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराने तक जमानत पर रिहा किया जाए?

सात साल में स्पेशल कोर्ट के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर भी नहीं

कोर्ट ने बिहार सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार से कहा, ‘आपने वर्ष 2016 में कानून पारित किया और सात साल बीतने के बावजूद आप विशेष अदालतें गठित करने के लिए अब भी जमीन देख रहे हैं। क्यों नहीं हम इस कानून के तहत दर्ज मामले के सभी आरोपियों को जमानत दे दें? आप अदालतों के लिए सरकारी इमारतों को खाली क्यों नहीं कर देते?’शीर्ष अदालत ने कहा कि इस अधिनियम के तहत 3.78 लाख आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से केवल 4116 मामलों का निस्तारण किया गया है जो दिखाता है कि ऐसे मामले की सुनवाई न्यायपालिका पर बोझ है। न्यायालय ने कहा, ‘ यही समस्या है, आपने न्यायापलिका की अवसंरचना और समाज पर पड़ने वाले असर को देखे बिना कानून पारित कर दिया। आप क्यों नहीं समझौते को प्रोत्साहित करते,अगर अवसरंचना समस्या है।’शीर्ष अदालत वर्ष 2016 में लागू शराबबंदी कानून से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही है। न्यायमित्र की भूमिका निभा रहे गौरव अग्रवाल ने कहा कि उच्च न्यायालय ने कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियों वाले प्रावधान पर आपत्ति जताई है और कानून के प्रावधानों में संशोधन की जरूरत है। पीठ ने कुमार को एक सप्ताह का समय राज्य सरकार से आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए देते हुए कहा कि वो इस मामले के सभी पहलुओं पर विचार करेगी।


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He Quit Singing Because of Body Shaming. Now He’s Making a Comeback.


By BY JAVIER C. HERNÁNDEZ from NYT Arts https://ift.tt/6Fr1Isp

कर्नाटक चुनाव: सिद्धरमैया कर रहे हैं नाटक, कोलार सीट से नहीं लड़ेंगे चुनाव- जानें येदियुरप्पा ने क्यों कहा ऐसा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता बी. एस. येदियुरप्पा ने सोमवार को दावा किया कि कांग्रेस नेता सिद्धरमैया कोलार सीट से विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, क्योंकि ऐसा कहकर वह सिर्फ नाटक कर रहे हैं और वह अपने गृहजिला मैसूरू लौट सकते हैं.

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