Friday, May 19, 2023

कर्नाटक में बीजेपी हारी, कांग्रेस आई लेकिन इससे क्या होगा... महाराष्ट्र में बोले KCR, विपक्षी एकता में दरार?

नांदेड़: कर्नाटक में चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस शपथग्रहण की तैयारी कर रही है। सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के शपथ ग्रहण समारोह में विपक्ष के कई नेताओं को आमंत्रित किया गया। हालांकि कई लोगों को इनवाइट नहीं किया गया है जिसमें बीएसपी प्रमुख मायावती, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव शामिल हैं। केसीआर को शपथग्रहण में न बुलाने के पीछे राजनीतिक टकराव की बात सामने आ रही है। केसीआर लंबे समय से थर्ड फ्रंट की पैरवी कर रहे हैं।अब केसीआर ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा है। महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक कार्यक्रम के दौरान तेलंगाना सीएम ने कर्नाटक चुनाव पर कमेंट किया। उन्होंने कहा, 'हाल के कर्नाटक चुनावों में बीजेपी हार गई और कांग्रेस सत्ता में आई। लेकिन, वहां भी कुछ नहीं बदलेगा। चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों ने खुद को बदला और अपने पिछले अनुभवों के साथ आगे बढ़े। ये देश जो कभी हमसे पीछे थे, अब हमसे आगे निकल गए हैं।'

केसीआर का कांग्रेस पर तंज?

केसीआर ने कांग्रेस को लेकर यह तंज कसा है और इशारे में कहा है कि कांग्रेस के आने से भी कर्नाटक में बदलाव नहीं होगा। केसीआर का बयान ऐसे समय पर आया है जब कर्नाटक चुनाव के नतीजों से विपक्षी दल उत्साहित हैं। साथ ही लोकसभा चुनाव में भी एक साल का वक्त बचा है।

तेलंगाना में इस साल चुनाव

तेलंगाना में इस साल चुनाव हैं जहां कांग्रेस का सीधा मुकाबला केसीआर की पार्टी बीआरएस से है। पिछले चुनाव में कांग्रेस यहां दूसरे नंबर की पार्टी थी। केसीआर को 47.4 फीसदी वोटों के साथ 88 सीटें मिली थीं जबकि कांग्रेस को 28.7 फीसदी वोटों के साथ 19 सीटें। के चंद्रशेखर राव ने महाराष्ट्र के 45,000 से अधिक गांवों में अपनी पार्टी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) का विस्तार करने के लिए महीने भर के कार्यक्रम की शुरुआत की। राव ने नांदेड़ में 'पार्टी कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम' को संबोधित करते हुए यह घोषणा की। इस दौरान महाराष्ट्र की सभी 288 विधानसभा सीटों के बीआरएस कार्यकर्ता मौजूद रहे।


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The Pentagon says an accounting mistake has freed up $3 billion more for Kyiv.


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Thursday, May 18, 2023

Peter Thiel Is Latest Billionaire Said to Have Met With Jeffrey Epstein


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कुछ ना कुछ गलत हो रहा है... जहीर खान ने खोल दी भारतीय तेज गेंदबाजों के फिटनेस की पोल

नई दिल्ली: भारत के पूर्व तेज गेंदबाज जहीर खान ने कहा कि वह इस बात को लेकर ‘हैरान’ हैं कि कई तेज गेंदबाज बार-बार चोटिल होने के कारण मैदान से बाहर समय बिता रहे हैं। उन्होंने साथ ही कहा कि कहीं ना कहीं कुछ गलत हो रहा है जिससे उन्हें इतनी ‘गंभीर चोटें’ लग रही हैं। कई महीनों से क्रिकेट से दूर जसप्रीत बुमराह के अलावा दाएं हाथ के तेज गेंदबाज दीपक चाहर और प्रसिद्ध कृष्णा भी चोटों के कारण लंबे समय तक मैदान से दूर रहे। चाहर ने मौजूदा आईपीएल में वापसी की लेकिन पैर की मांसपेशियों में चोट के कारण चेन्नई सुपर किंग्स के लिए बीच में कुछ मैच नहीं खेल पाए जबकि प्रसिद्ध को पीठ से संबंधित परेशानी हुई जिसके परिणामस्वरूप उन्हें स्ट्रेस फ्रैक्चर हो गया। जहीर ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'इससे आपकी तरह मैं भी हैरान हूं। आपने गेंदबाजों का जिक्र किया लेकिन कुछ बल्लेबाज भी गंभीर चोटों का सामना कर रहे हैं। यह मेरी समझ से परे है और निश्चित तौर पर इसका संयोजन से कुछ लेना-देना है।' उन्होंने कहा, 'कुछ चीजों को ध्यान से देखने की जरूरत है कि वे पूरे सत्र में क्या कर रहे हैं, उनकी ट्रेनिंग और उनके आराम से उबरने का अनुपात और बहुत सारी अन्य चीजें।' इस पूर्व तेज गेंदबाज ने कहा, 'सिर्फ एक शब्द (वर्णन करने के लिए) में बताना बहुत मुश्किल है कि वास्तव में क्या चल रहा है, लेकिन मैं कहूंगा कि हां, कहीं न कहीं कुछ गलत हो रहा है क्योंकि इन सभी खिलाड़ियों को इतनी बड़ी चोट लग रही हैं।' लेकिन जहीर इस आईपीएल में अन्य दो प्रमुख भारतीय तेज गेंदबाजों मोहम्मद शमी और मोहम्मद सिराज के प्रदर्शन से खुश दिखे। उन्होंने कहा, 'उन्हें खेलते हुए देखना शानदार है। उन्होंने चीजों को सरल रखा है, कुछ ऐसा जो आवश्यक है। मैं कहूंगा कि यह पावरप्ले में खेलने का सही तरीका है और यह देखना बहुत अच्छा है कि गेंदबाज (उनके जैसे) इस तरह के उदाहरण पेश कर रहे हैं, चीजों को सरल रख रहे हैं और प्रारूप की जटिलताओं में नहीं फंस रहे।' जहीर ने कहा कि शमी और सिराज के लिए व्यस्त आईपीएल का उनके कार्यभार पर ज्यादा असर नहीं पड़ना चाहिए क्योंकि टेस्ट मैच की तुलना में कम ओवर गेंदबाजी करनी होती है। भारतीय टीम को सात जून से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल भी खेलना है। इससे पूर्व तेज गेंदबाज ने मौजूदा आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद के उमरान मलिक को संभालने और इस्तेमाल करने के तरीके पर असंतोष व्यक्त किया जिनकी गति ने सभी को प्रभावित किया है। जहीर ने कहा, 'मुझे लगता है कि उमरान मलिक को फ्रेंचाइजी द्वारा अच्छी तरह से संभाला नहीं गया है। सनराइजर्स उनकी सेवाओं का बेहतर इस्तेमाल कर सकते थे और यह स्पष्ट है।' मुंबई इंडियंस के क्रिकेट विकास के वैश्विक प्रमुख जहीर ने कहा कि स्ट्राइक तेज गेंदबाजों जसप्रीत बुमराह और जोफ्रा आर्चर की गैरमौजूदगी के बावजूद फ्रेंचाइजी ने अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा, 'जब आप मुंबई इंडियंस के बारे में बात करते हैं और जब आप देखते हैं कि सत्र चला है तो यह एक आसान सत्र नहीं रहा है (क्योंकि) पहले बुमराह और फिर जोफ्रा आर्चर बाहर हो गए। यह गेंदबाजी के लिहाज से कठिन सत्र रहा है लेकिन बल्लेबाजी बहुत अच्छी रही है- मैं इसे इसी तरह देखता हूं।'


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How Did This Pasta End Up in the Woods? Students Share Their Theories.


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जापान के हिरोशिमा में होने वाला G7 शिखर सम्मेलन इतना महत्वपूर्ण क्यों? जानें किन मुद्दों पर होगी चर्चा

तोक्यो: दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोकतंत्रों में से सात के नेता इस सप्ताह के अंत में द्वितीय विश्व युद्ध में परमाणु हमले का शिकार हुए हिरोशिमा में बैठक करेंगे। इस बैठक को G7 के नाम से जाना जाता है। यूक्रेन युद्ध के दौरान बढ़ते परमाणु हमले के खतरे के बीच हिरोशिमा में बैठक दुनिया के लिए होने वाली तबाही का एक प्रतीकात्मक संकेत भी है। माना जा रहा है कि इस बैठक में चीन, रूस और उत्तर कोरिया की बढ़ती आक्रामकता, तेल और गैस के दाम, ग्लोबल वार्मिंग जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो सकती है।

G7 के लिए हिरोशिमा को क्यों चुना गया

पूरी दुनिया इस समय गंभीर सुरक्षा संकट का सामना कर रही है। रूस यूक्रेन युद्ध और उत्तर कोरिया की हठधर्मिता के कारण परमाणु हमले का खतरा बना हुआ है। ऐसे में G7 की बैठक एक ऐसे शहर में हो रही है, जो परमाणु हमले का शिकार हो चुका है। बैठक वाली जगह से हिरोशिमा का शांति स्मारक संग्रहालय ज्यादा दूर नहीं है। यहां दर्जनभर घड़ियां प्रदर्शित हैं, जिनमें से कई अब भी सुबह 8.16 बजे रुकी हैं। 6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने हिरोशिमा पर सुबर 8.16 मिनट पर परमाणु हमला किया था। शुरुआती विस्फोट में 70,000 लोग मारे गए थे और दसियों हज़ार अन्य लोगों को धीरे-धीरे जलने या जलने से मरने के लिए छोड़ दिया था।

G7 शिखर सम्मेलन क्या है?

G7 सात प्रमुख औद्योगिक राष्ट्रों का एक अनौपचारिक समूह है। इसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। इसकी अध्यक्षता सात सदस्य देशों के बीच बारी-बारी से रहती है। इस साल जी-7 की अध्यक्षता जापान के पास है। इसमें । यूरोपीय संघ के दो प्रतिनिधि भी शामिल हैं। पहले से चली आ रही परंपरा के अनुसार, जी-7 की बैठक में कुछ गैर सदस्य राष्ट्रों के प्रमुख और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के नेता भी भाग लेते हैं। इस दौरान इन देशों के नेता आर्थिक नीति, सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा और लिंग सहित कई मुद्दों पर चर्चा करते हैं।

बैठक में कौन से बाहरी देशों के नेता आ रहे

इस वर्ष जी-7 की बैठक में ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कोमोरोस, कुक आइलैंड्स, भारत, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया और वियतनाम के नेताओं को आमंत्रित किया गया है। यह निमंत्रण जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के ग्लोबल साउथ और अमेरिका के विकासशील देशों तक पहुंचने की रणनीति के तहत दिए गए हैं। इस बैठक में संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन, विश्व बैंक, विश्व स्वास्थ्य संगठन और विश्व व्यापार संगठन के नेताओं को भी आमंत्रित किया जाता है।

G7 की प्रासंगिकता पर उठ रहे सवाल

G7 के बाहर के नेताओं को निमंत्रण सहयोगी और भागीदार देशों में सहयोग बढ़ाने के लिए हैं। हालांकि, वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में जी-7 देशों की हिस्सेदारी चार दशक पहले के लगभग 50 प्रतिशत से घटकर अब लगभग 30 प्रतिशत रह गई है। इससे चीन, भारत और ब्राजील जैसी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं ने भारी लाभ कमाया है। यही कारण है कि अब जी -7 की प्रासंगिकता और विश्व अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने में इसकी भूमिका के बारे में सवाल उठ रहे हैं।

G7 के प्रमुख मुद्दे क्या हैं?

उम्मीद की जा रही है कि G7 की बैठक में सदस्य देशों के नेता यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस की निंदा करेंगे। इसके साथ ही वे यूक्रेन के लिए अपना समर्थन जारी रखने का संकल्प भी लेंगे। यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जी-7 के सत्र में शामिल होंगे। इसके अलावा ताइवान के खिलाफ चीनी आक्रामकता पर भी चर्चा की जाएगी। सदस्य देश चीन की भी निंदा कर सकते हैं। हालांकि, इनमें से कोई भी देश ताइवान को स्वतंत्र देश के तौर पर मान्यता नहीं देता है। इसके अलावा जी-7 देश चीन और रूस के खिलाफ ग्लोबल साउथ देशों को मदद का भी ऐलान कर सकते हैं। इनमें मित्र देशों के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित करने के लिए स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और बुनियादी ढाँचे में अधिक सहायता प्रदान करने का भी ऐलान किया जा सकता है।


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By BY MANOHLA DARGIS from NYT Movies https://ift.tt/QWIJ5L0