मिशन मालामाल के चक्कर में बिहार के दो युवकों ने दिल्ली में महिला और उसकी बेटी की हत्या कर दी. इसमें से एक गायक है और वह ओटीटी पर रिलीज होने वाली एक फिल्म के लिए संगीत तैयार कर रहा था.
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Sunday, June 4, 2023
पटना में 12 जून को होने वाली विपक्षी दलों की बैठक टली, जल्द होगा नई तारीख का ऐलान!
पटना: बिहार की राजधानी पटना में 12 जून को होने वाली विपक्षी दलों की बैठक टलने की खबर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेता राहुल गांधी बैठक के लिए मौजूद नहीं है। ऐसे में मुख्य विपक्षी दल के साथ परामर्श कर 12 जून को होने वाली बैठक की बाद की तारीख पर करने का विचार किया गया है। ताकि वो भी इसमें शामिल हो सकें। सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही विपक्षी एकता की बैठक के लिए नई तारीख का ऐलान किया जाएगा।
अमेरिका में हैं राहुल गांधी
राहुल अभी अमेरिका की यात्रा पर हैं। पहले खबर आ रही थी कि 12 जून को होने वाली बैठक में न राहुल गांधी शामिल होंगे और ना ही मल्लिकार्जुन खरगे। उनकी जगह कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि शामिल होगा। बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने साफ कहा था कि 12 जून की बैठक में राहुल गांधी और खड़गे में से कोई भी शामिल नहीं होगा। इसके बाद विपक्षी एकता पर बीजेपी भी तंज करने लगी थी।बीजेपी के खिलाफ विपक्षी दलों को एकजुट करने में लगे हैं नीतीश
जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री ने 2024 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील की थी। इसके लिए नीतीश कुमार ने कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप),और वाम दलों के अलावा कई क्षेत्रीय क्षत्रपों से बातचीत की पहल की है। नीतीश ने राहुल और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार सहित कई दलों के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें की हैं।from https://ift.tt/WdCBGj0
Saturday, June 3, 2023
ओपिनियन : इतने बड़े हादसे पर तो रहने देतीं, क्या ये सियासत का वक्त है ममता जी
नई दिल्ली: ओडिशा के बालासोर में 2 जून हुए भीषण सड़क हादसे में तीन ट्रेनों की टक्कर और उसके बाद लोगों के क्षत-विक्षत शव ने हर किसी की रूह कंपा दी है। हादसे वाली जगह से जो तस्वीरें सामने आई हैं वो वाकई भयावह हैं। देखकर आंखों को विश्वास नहीं हो रहा कि ये सब कैसे हो गया। 288 लोगों की मौत और 800 के करीब घायलों की सूची हर किसी की आंखें नम कर रहे हैं। ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक से लेकर रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव और खुद पीएम मोदी ने मोर्चा संभाला। पीएम मोदी ने क्लियर मैसेज दे दिया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। सख्त से सख्त सजा और घायलों का हरसंभव इलाज हमारी प्राथमिकता है। इस रेल हादसे वाली जगह पर पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी आई थीं। पहले तो उन्होंने घटना पर शोक जताया, इतिहास का सबसे बड़ा रेल हादसा बताया लेकिन, बाद में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से उलझ गईं। दो बार ऐसा हुआ कि रेल मंत्री को ममता दीदी को टोकना पड़ा।ममता आई तो थीं लोगों के सामने हादसे पर संवेदना प्रकट करने लेकिन, आरोप का जो दौर शुरू हुआ उसके बाद अलग ही नजारा देखने को मिला। टोकने के बावजूद उन्होंने कहा कि वह रेलवे को भी सलाह दे सकती हैं। कुलमिलाकर सियासत का भी रंग इस हादसे पर चढ़ गया। लेकिन, क्या यह सही था? एक ऐसे मौके पे जब सबकुछ भूलकर वो भी राजनीति से ऊपर उठकर मदद और पीड़ित परिवारजनों के साथ खड़े होने का समय है, वहां ममता बनर्जी का यह व्यवहार कहां तक जायज है? जो ममता बनर्जी 2010 में रेल मंत्री रहते अपने कार्यकाल में हुए रेल हादसों को विपक्ष की साजिश और मंचों से भाषण दे रही थीं वो अब इस रेल हादसे को सियासत का मैदान बनाने का सोच रही हैं। किस मसले पर रेल मंत्री से उलझ गईं सीएम ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बालासोर पहुंची थीं। उसी हादसे वाली जगह जहां 2 जून को भीषण रेल दुर्घटना हुई थी। पहले तो उन्होंने इसे सदी का सबसे बड़ा रेल हादसा बताया और उसके बाद मीडिया, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित कई अधिकारियों से बात की। चल तो सबकुछ ठीक ही रहा था कि अचानक रेल मंत्री और ममता दीदी के बीच नोकझोंक देखने को मिली। दो बार तो ऐसा हुआ कि रेल मंत्री ने ममता बनर्जी को टोंका। जहां उन्हें रेल हादसे से पीड़ित लोगों का हाल-चाल जानना था वहां उन्होंने आरोपो की झड़ी लगा दी। ममता ने कहा कि वो रेलवे को भी नसीहत दे सकती हैं। ममता ने कहा कि रेलवे में तालमेल की कमी है। उन्होंने अपने से कहा कि इस हादसे में 500 लोग मारे जा चुके हैं। जबकि रेलवे ने खुद कहा कि इस एक्सीडेंट में 288 लोगों की मौत हुई है। मतलब आंकड़े भी फर्जी थे। जब वह लगातार बोल रही थीं तब अश्विनी वैष्णव ने उनसे बहस नहीं की और कोई पलटवार भी नहीं किया। हालांकि एक दो जगह टोका जरूर। रेलवे के बजट पर हमला, आंकड़े भी गलत ममता ने कहा कि रेलवे के बजट को घटा दिया गया है। जबकि यह सही नहीं है। इस साल के रेल बजट के खर्च को बढ़ाकर 2.40 लाख करोड़ किया गया है। यह अबतक का सबसे ज्यादा है। 2013-14 के मुकाबले 9 गुना ज्यादा आवंटित किया गया है। ममता बनर्जी ने फिर कहा कि ऐसे हादसों में रेल हादसों में सिस्टम है कि मारे गए लोगों को 15 लाख मिलता है। फिर रेल मंत्री से पूछा कि 10 या 15 लाख? रेल मंत्री ने कहा कि 10। इसके बाद उन्होंने मरने वालों की संख्या फिर 500 बता दी। जिसपर रेल मंत्री ने कहा कि आंकड़ा ऐसा नहीं है। ममता ने तो सोच लिया था कि आज तो सियासत होकर रहेगी। उन्होंने रेल मंत्री वैष्णव से कहा कि 3 डिब्बे क्लियर नहीं हुए हैं। इसपर अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सब क्लियर हो चुका है। ममता का हमला फिर केंद्र सरकार की तरफ शुरू हो गया। ममता ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि वह रेलवे को सलाह भी दे सकती हैं। अपना कार्यकाल भूल गईं ममता बनर्जी ओडिशा के बालासोर रेल हादसे के बाद सीएम ममता बनर्जी केंद्र सरकार के खिलाफ इतनी मुखर हैं। जब वह यूपीए शासन में केंद्र में रेल मंत्रालय का पद्भार संभाल रही थीं तब क्या हुआ था। यह वही ममता बनर्जी हैं जो साल 2010 में सैंथिया जंक्शन में ट्रेन हादसे के बाद पार्टी कार्यक्रम और मंच से भाषणबाजी कर ही थीं। यहां तो कम से कम पीएम मोदी ने गोवा में वंदे भारत का उद्घाटन कैंसिल करने के साथ घायलों से मुलाकात के अलावा घटनास्थल का भी दौरा किया। एक्सीडेंट के तुरंत बाद ही रेल मंत्री ने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए बालासोर के लिए रवाना हो गए थे। लेकिन आप तो साल 2010 में हुए रेल हादसे के बाद भी मंच से लच्छेदार भाषण दे रही थीं। 2010 में हुए सैंथिया जंक्शन में ट्रेन हादसे में 65 लोगों की मौत हो गई थी। कहानी यहीं खत्म हो जाए तो क्या है फिर। साल 2010 था ही। ममता दीदी को याद दिलाया जाए कि 28 मई को ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के 13 डिब्बे पटरी से उतर गए थे। इस हादसे में 140 से अधिक या 170 लोगों की मौत हो गई थी। पश्चिमी मिदनापुर में हुई इस घटना के बाद चारों ओर हाहाकार मच गया था। दूसरी ओर से आती मालगाड़ी ने ट्रेन की पांच बोगियों को टक्कर मारी, जिसके चलते हादसा और भीषण हो गया था। तब रेल हादसे का आरोप उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों और माओवादियों पर लगा दिए थे। कहा कि ये उन लोगों की साजिश है। ममता दीदी ने तब कहा था कि माओवादी आतंकवादियों से ज्यादा खतरनाक हैं। आप शांति की बात कह कर लोगों को मार नहीं सकते। हम पीछे बैठकर नहीं देख सकते। लेकिन उन्हें सीपीआई एम के लीडर सीताराम येचुरी ने ही याद दिलाया कि ममता बनर्जी ने कहा था कि माओवादी राज्य में हैं ही नहीं। तब सीपीएम के राज्य सचिव बिमान बोस ने कहा था कि रेल मंत्री को ज़िम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए ना कि माओवादियों पर जिम्मेदारी डालनी चाहिए। अब आज के से तुलना करें तो। यही रेल मंत्री कह देते कि यह हादसा विपक्ष की साजिश है तब क्या होता। अगर ममता को सियासत ही करना था तो पहले अपना रेल मंत्री का कार्यकाल याद कर लेना चाहिए था।
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Sadhvi Story: 25 साल की उम्र में बन गईं साध्वी, अमेरिका के यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई, दिलचस्प है पूरी कहानी
Sadhvi Bhagawati Saraswati Life story: अक्सर आपने ऐसी कहानियां सुनी होंगी कि भारत से अमेरिका कोई पढ़ाई या नौकरी के लिए गया या किसी ने वहीं बिजनेस शुरू कर दिया, लेकिन ये कहानी थोड़ी इसके उलट है. यह कहानी है एक ऐसी लड़की की, जो महज 25 वर्ष की उम्र में 25 साल पहले अमेरिका से भारत आई और यहां की फिजा में न केवल रच बस गई, बल्कि उसने आध्यात्म की राह पकड़ ली और कैलिफोर्निया से पीएचडी करने वाली लड़की साध्वी बन गई. ये कहानी है परमार्थ निकेतन ऋषिकेश की साध्वी भगवती सरस्वती की. न्यूज़ 18 हिन्दी ने भगवती सरस्वती से बातचीत की. आइए जानते हैं उनके जीवन की पूरी कहानी...
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अगर विदेश यात्रा पर हूं तो मैं वहां राजनीति नहीं करूंगा, जयशंकर ने राहुल गांधी को पाठ पढ़ा दिया?
नई दिल्ली : विदेश मंत्री एस ने कांग्रेस नेता के अमेरिका में दिए गए भाषण को लेकर परोक्ष रूप से निशाना साधा है। राहुल के अमेरिका में दिए गए भाषण से जुड़े सवाल के जवाब में विदेश मंत्री ने परोक्ष रूप से राहुल गांधी को पाठ भी पढ़ाया। विदेश मंत्री ने कहा कि अगर मैं विदेश की यात्रा पर हूं तो मैं वहां राजनीतिक नहीं करूंगा। अगर मुझे बहस करनी होगी तो मैं अपने देश में करूंगा। एक लोकतांत्रिक देश में सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी, राष्ट्रीय हित, सामूहिक छवि होती है। कुछ चीज़ें राजनीति से ऊपर उठकर होती हैं। जब आप देश के बाहर कदम रखते हैं तो आपको यह बातें ध्यान में रखनी चाहिए।
कुछ चीजें राजनीति से ऊपर होती हैं
विदेश मंत्री एस जयशंकर साउथ अफ्रीका के केपटाउन में थे। जयशंकर यहां केप टाउन में भारतीय समुदाय के लोगों के साथ बातचीत कर रहे थे। इस दौरान भारतीय मूल के एक व्यक्ति ने विदेश मंत्री से राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा और वहां पीएम मोदी और देश को लेकर की गई बातचीत से जुड़ा सवाल पूछा। इस सवाल के जवाब में विदेश मंत्री ने मैं सिर्फ अपने बारे में बात कर सकता हूं। उन्होंने कहा कि कुछ चीजें राजनीति से हटकर होती हैं। ये चीजें राजनीति से कहीं बड़ी होती हैं। उन्होंने कहा कि मैं इस बारे में किसी अन्य से बिल्कुल अलग राय रखता हूं या कोई मेरे से अलग राय रखता हैं तो मैं यह अपने घर में चर्चा या तर्क रखूंगा।केंद्र पर ध्रुवीकरण का आरोप
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने अमेरिका में पीएम मोदी, एनडीए सरकार की आलोचना की थी। राहुल गांधी ने देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर भी टिप्पणी की थी। राहुल गांधी ने बीजेपी के नेतृत्व वाले केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा था कि सत्ताधारी पार्टी समाज का ध्रुवीकरण करती है और समावेशी नहीं है। इससे भारत को नुकसान हो रहा है। राहुल ने कहा था कि उन्होंने कुछ हद तक नफरत पैदा करने, समाज का ध्रुवीकरण करने की कोशिश की और वे समावेशी नहीं हैं। राहुल ने कहा था कि मुझे लगता है कि प्रेस की स्वतंत्रता कमजोर हो रही है। यह छिपी नहीं है और यह भारत में स्पष्ट है, बाकी सभी देशों में यह स्पष्ट है। दुनिया इसे देख सकती है।पीएम मोदी की भगवान से तुलना
कांग्रेस नेता गांधी ने बुधवार को अमेरिका में कैलिफोर्निया प्रांत के सांता क्लारा में प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा था। राहुल ने पीएम मोदी को एक ऐसा व्यक्ति बताया था, जो सोचते हैं कि वह भगवान से अधिक जानते हैं। उन्होंने कहा था, 'असल में, ऐसे लोगों को यह लगता है कि वे भगवान से भी अधिक जानते हैं। उन्हें भगवान के साथ बैठा दिया जाए तो वह उन्हें भी समझा देंगे कि क्या कुछ हो रहा है। जाहिर है कि हमारे प्रधानमंत्री उसका एक उदाहरण हैं।' कांग्रेस नेता ने कहा था, 'यदि आप मोदीजी को भगवान के साथ बिठा दें, तो वह उन्हें विस्तार से समझा सकते हैं कि ब्रह्मांड कैसे चलता है और भगवान भी चकरा जाएंगे कि ये मैंने क्या बनाया है।'from https://ift.tt/0sL9uFx
नई डेडलाइन ने बढ़ाई फरीदाबाद-ग्रेटर नोएडा की दूरियां, मंझावली पुल परियोजना का काम अब अगले साल तक होगा पूरा
फरीदाबाद: और फरीदाबाद को जोड़ने वाली का काम अब मार्च 2024 तक पूरा हो सकेगा। परियोजना के दोनों चरण का काम पूरा करने के लिए पीडब्ल्यूडी ने यह नई डेडलाइन तय की है। इसमें पुल की अप्रोच रोड के साथ पुल को फरीदाबाद शहर से जोड़ने वाली सड़क को चौड़ा करने का काम शामिल है।फरीदाबाद व ग्रेटर नोएडा को जोड़ने के लिए मंझावली पुल परियोजना पर काम चल रहा है। यह परियोजना दो चरणों में पूरी की जा रही है। पहले चरण में पुल व उसकी अप्रोच रोड बनाने का काम किया जा रहा है। दूसरे चरण में पुल को शहर से जोड़ने वाली 19 किमी लंबी सड़क को चौड़ा करने का काम किया जा रहा है। दोनों चरण का काम पूरा कर परियोजना को पूरी तरह से तैयार करने के लिए पहले मार्च 2023 तक की डेडलाइन तय की गई थी। उसके बाद दिसंबर 2023 और अब PWD ने मार्च 2024 तक पूरा करने का दावा किया है। फिलहाल क्या है काम की स्थितिमौके पर काम की स्थिति को देखें तो पहले चरण के तहत यमुना नदी पर पुल तैयार है। यमुना पार के हिस्से में लगभग 900 मीटर लंबी अप्रोच रोड बनाने का काम चल रहा है, लेकिन गांव मंझावली की तरफ अप्रोच रोड का काम बंद है। इस काम को तीन से चार महीने में पूरा करने की बात कही जा रही है। इसके बाद पुल को ट्रैफिक के लिए खोला जा सकेगा। दूसरे चरण के तहत मंझावली से फरीदाबाद को जोड़ने वाली सड़क काम शुरू किया जा रहा है। रोड के साथ लगे बिजली के खंभों को शिफ्ट करने का काम किया जा रहा है। पेड़ों की कटाई का काम चल रहा है। पुरानी सड़क को उखाड़ दिया गया है। जगह-जगह पानी निकासी के लिए छोटे नाले तैयार हैं और गांव नचौली के पास से सड़क की खुदाई करने का काम शुरू कर दिया है। क्या हैं देरी के कारणनदी पर पुल 2023 की शुरुआत में ही तैयार हो गया था, लेकिन पैसा जारी न होने से अप्रोच रोड का काम रुका हुआ था। अब PWD ने जल्द ही भुगतान करने की बात कहकर काम को शुरू करा दिया है। सड़क को चौड़ा करने का काम पेड़ों को काटने की मंजूरी न मिलने से रुका हुआ था। वन विभाग से मंजूरी मिलने के बाद अब पेड़ों की कटाई शुरू हो गई है और रोड पर काम भी शुरू हो गया है।
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ओडिशा रेल हादसे के बाद बेतहाशा बढ़ गया भुवनेश्वर की फ्लाइट्स का किराया, सरकार ने एयरलाइंस को दिए सख्त निर्देश
Odisha Train Crash News: ओडिशा के बालासोर में शुक्रवार रात हुए भीषण रेल हादसे में कम से कम 288 लोगों की मौत हो गई और 800 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं. मंत्रालय ने ओडिशा से विमान सेवाएं संचालित करने वाली सभी एयरलाइंस से इस ट्रेन हादसे में जान गंवाने वाले यात्रियों के शवों को मौजूदा नीति के अनुसार उनके गृहराज्य तक पहुंचाने में पूरा सहयोग करने को भी कहा है.
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