Monday, February 12, 2024

नीदरलैंड ने इजरायल को दिया बड़ा झटका, F-35 के पुर्जों की बिक्री पर लगाई रोक, कारण क्या है

हेग: एक अपीलीय अदालत ने नीदरलैंड सरकार को सोमवार को आदेश दिया कि वह लड़ाकू विमान एफ35 के पुर्जे का निर्यात इजरायल को करना बंद करे। अदालत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के स्पष्ट जोखिम का हवाला देते हुए यह आदेश दिया। मानवाधिकार संगठनों की तिकड़ी ने दिसंबर में नीदरलैंड के खिलाफ एक दीवानी मुकदमा दायर किया, जिसमें तर्क दिया गया कि गाजा पट्टी में इजरायली सैन्य कार्रवाई के आलोक में अधिकारियों को निर्यात लाइसेंस का पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता है। ऑक्सफैम नोविब, पैक्स नीदरलैंड और द राइट्स फोरम ने दिसंबर में यह मामला दायर किया था।न्यायाधीश बास बोएले ने फैसला सुनाते हुए कहा, ''इस स्पष्ट जोखिम से इनकार नहीं किया जा सकता है कि निर्यात किए गए एफ-35 के पुर्जे का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन करते हुए किया जाए।'' अदालत ने कहा कि निर्यात सात दिनों के भीतर बंद होना चाहिए। यह निर्णय तब आया, जब नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रट ने संघर्ष पर चर्चा करने के लिए प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मिलने के लिए इजराइल की यात्रा की। रट के फलस्तीनी प्रधानमंत्री मोहम्मद शतायेह से भी अलग से मिलने की संभावना है।

डच मंत्री ने क्या कहा

डच व्यापार मंत्री जेफ्री वैन लीउवेन ने कहा कि लड़ाकू विमान इजरायल की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह कहना जल्दीबाजी होगी कि उनके देश से कलपुर्जों के निर्यात पर प्रतिबंध का इजरायल को होने वाली समग्र आपूर्ति पर कोई ठोस प्रभाव पड़ेगा या नहीं। उन्होंने कहा, "हम देशों के एक बड़े संघ का हिस्सा हैं जो इजरायल के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। हम भागीदारों से बात करेंगे कि इससे कैसे निपटा जाए। नीदरलैंड में अमेरिका के स्वामित्व वाले एफ-35 लड़ाकू विमान के कलपुर्जों का एक स्थानीय गोदाम है। अमेरिका यहां से एफ-35 ऑपरेट करने वाले देशों को कलपुर्जों की सप्लाई करता है।

इजरायली हमलों में 28000 फिलिस्तीनियों की मौत

हमास के नियंत्रण वाले गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि है कि इजरायल के बड़े पैमाने पर हवाई और जमीनी हमले में 28,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं, और इसके 2.3 मिलियन लोगों में से अधिकांश को अपने घरों से भागने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इजरायल गाजा पर अपने हमलों में युद्ध अपराध से इनकार करता है। इजरायल ने 7 अक्टूबर को हमास के हमलों के बाद से गाजा पट्टी पर हमला किया था। हमास के हमलों में 1,200 इज़राइली मारे गए थे और लगभग 240 को बंधक बना लिया गया था।


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Sunday, February 11, 2024

धर्मशीला गुप्ता 2022 में जेडीयू उम्मीदवार से हार गई थीं मेयर का चुनाव, बीजेपी ने अब बनाया राज्यसभा उम्मीदवार

दरभंगा: बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. धर्मशीला गुप्ता को बीजेपी ने राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। पार्टी के इस फैसले से कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई है। डॉ. धर्मशीला गुप्ता डॉ. नागेंद्र झा महिला महिला विद्यालय में सामाजिक विज्ञान की शिक्षिका हैं। उन्होंने अपना राजनीतिक जीवन भाजपा में एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में शुरू की थी। उनकी कठिन तपस्या पार्टी के अंदर भी जारी रही। पार्टी में उनका कद लगातार बढ़ता गया। डॉ. गुप्ता ने जीवन में पहला चुनाव दरभंगा नगर निगम में लड़ा। बतौर वार्ड पार्षद चुनाव जीतकर लोगों के बीच पहुंची। उसके बाद उन्होंने मेयर के तौर पर लड़ाई लड़ी। इस लड़ाई में वो जेडीयू समर्थित उम्मीदवार अंजुम आरा से हार गईं।

पार्टी ने दिया मौका

पार्टी ने सबसे पहले उन्हें दरभंगा जिला भाजपा महिला प्रकोष्ठ का जिलाध्यक्ष बनाया। पार्टी की ओर से उन्हें कोल इंडिया का सदस्य बनाया। डॉ. धर्मशीला गुप्ता वर्तमान में कोल इंडिया की सदस्य हैं। धर्मशीला गुप्ता 2022 में दरभंगा नगर निगम के चुनाव में मेयर के पद के लिए फाइट किया। हालांकि वो ये चुनाव हार गईं। डॉ. धर्मशीला गुप्ता को राज्यसभा उम्मीदवार बनाये जाने पर भाजपा नेता सुजीत मल्लिक ने कहा कि बहुत खुशी हुई कि पार्टी ने एक बार फिर साधारण कार्यकर्ता को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। वहीं आदित्य नारायण चौधरी 'मन्ना' ने कहा कि ये बीजेपी में ही सम्भव है। साधारण कार्यकर्ता को पार्टी हमेशा सम्मान देती है।

बीजेपी की सियासत

उधर, स्थानीय सियासी जानकारों की मानें, तो बीजेपी ने डॉ. धर्मशीला गुप्ता को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर एक साथ कई चीजें साधने की कोशिश की है। डॉ. धर्मशीला गुप्ता किसी बड़े राजनीतिक परिवार से नहीं आतीं। न ही उनका कोई राजनीतिक रसूख है। वो अपने बल पर पार्टी के काम को अच्छे ढंग से संचालित करती रही हैं। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजकर पूरे मिथिला के महिला मतदाताओं को अपने पाले में करने की कोशिश की है। वहीं दूसरी ओर डॉ. धर्मशीला गुप्ता वैश्य समाज से आती हैं। उन्हें राज्यसभा भेजकर मिथिलांचल के सभी वैश्य मतदाताओं को रिझाने की कोशिश हुई है। बीजेपी लोगों के बीच इस बात को ले जाएगी कि वो किसी भी साधारण कार्यकर्ता को राज्यसभा भेज सकती है।

समाज सेवा से शुरू किया करियर

डॉ. धर्मशीला गुप्ता ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत नगर निगम के चुनाव में किस्मत आजमाकर किया। जब उन्होंने वार्ड पार्षद का चुनाव जीत लिया। उसके बाद वो मेयर की प्रत्याशी बनीं। इस चुनाव में उन्हें 21 हजार 380 वोट मिले। हालांकि, ये चुनाव 8 हजार 734 मतों से हार गईं। डॉ. गुप्ता को जेडीयू की समर्थित उम्मीदवार अंजुम आरा ने हरा दिया। डॉ. गुप्ता उसके बाद भी निराश नहीं बैठीं। पार्टी के कार्यक्रमों को बढ़-चढ़कर हमेशा जनता तक पहुंचाया। वे प्रधानमंत्री मोदी से भी एक बार कार्यक्रम में मिल चुकी हैं। डॉ. धर्मशीला गुप्ता ने पार्टी कार्यक्रमों में हमेशा बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पार्टी के लिए प्रचार-प्रसार का काम किया। बीजेपी को ज्यादा समर्थन मिले। इसके लिए उन्होंने लोगों को जागरूक किया।


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Saturday, February 10, 2024

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट को लेकर था विवाद! दिल्ली के नजफगढ़ गोलीकांड का खुलासा

नई दिल्ली: दिल्ली के नजफगढ़ में एक सैलून के अंदर दो लोगों की गोली मारकर हत्या करने के एक दिन बाद पुलिस ने दोनों हमलावरों की पहचान कर ली है। सूत्रों ने बताया कि पुलिस को संदेह है कि सोशल मीडिया पर एक पोस्ट को लेकर विवाद घटना की वजह बनी।उन्होंने बताया कि दोनों आरोपियों की पहचान संजीव दहिया उर्फ संजू और हर्ष उर्फ चिंटू के रूप में हुई है जिन्होंने शुक्रवार को नजफगढ़ के इंदिरा पार्क में आशीष और सोनू की गोली मारकर हत्या कर दी। हमले में मारे गए व्यक्ति बाल कटवाने के लिए सैलून गए थे। सोशल मीडिया पर वायरल वारदात के कथित सीसीटीवी फुटेज में एक शख्स हमलावरों से गुहार लगाता नजर आ रहा है। हमलावरों ने बेहद करीब से उनके सिर में गोलियां मारी थी। फुटेज में सैलून की दो महिला कर्मचारी भी डरकर भागती नजर आ रही हैं।पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह आपसी दुश्मनी का मामला प्रतीत होता है जो एक अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट के कारण उत्पन्न हुआ होगा। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद हत्याकांड के पीछे का सही कारण पता चलेगा। सूत्रों ने कहा कि दहिया दिल्ली की एक अदालत में वकालत करता है लेकिन अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।वहीं, जेल में बंद गैंगस्टर योगेश टुंडा का भाई हर्ष उर्फ चिंटू हाल ही में जमानत पर जेल से रिहा हुआ है। आरोपियों को पकड़ने के लिए स्थानीय पुलिस और अपराध शाखा की कम से छह टीम गठित की गई है। पुलिस उपायुक्त (द्वारका) अंकित सिंह ने कहा कि पुलिस आरोपियों को पकड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, 'आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद कुछ चीजें स्पष्ट हो पाएंगी।'


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Friday, February 9, 2024

सुप्रीम कोर्ट ने Voter ID फॉर्म में बदलाव नहीं करने को लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ याचिका की खारिज

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने नये मतदाताओं के पंजीकरण और पुराने लोगों के विवरण को अद्यतन करने के लिए ‘आधार’ संख्या की मांग करने वाले फॉर्म में एक विशेष बदलाव नहीं करने को लेकर निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने की याचिका पर विचार करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया।पिछले साल सितंबर में, आयोग ने शीर्ष अदालत से कहा था कि वह मतदाता सूची में नये मतदाताओं को जोड़ने और पुराने लोगों के रिकॉर्ड को अद्यतन करने के लिए ‘आधार’ संख्या प्रदान करने को ध्यान में रखते हुए अपने फॉर्म में बदलाव करेगा। उसने न्यायालय से कहा था कि इसके साथ ही वह इसे ध्यान में रखेगा कि मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) के लिए आधार संख्या मुहैया करना वैकल्पिक है। निर्वाचन आयोग एक ही मतदाता की कई बार हुई प्रविष्टियों को खत्म करने के लिए आधार को मतदाता सूची से जोड़ने पर एक नया नियम लेकर आया था।सितंबर से आवश्यक कदम नहीं उठाने को लेकर, शुक्रवार को प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा तथा न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ से आयोग के तीन अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने का आग्रह किया गया। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अदालत ने (निर्वाचन आयोग के लिए) समय सीमा तय नहीं की थी... इसके अलावा, उन्हें (आयोग के अधिकारियों को) चुनाव से पहले बहुत काम करना होगा। पीठ ने कहा कि अवमानना हमेशा अदालत और कथित अवमाननाकर्ताओं के बीच होती है। हम इस पर विचार नहीं करने जा रहे हैं। यह खारिज की जाती है। तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष जी निरंजन ने निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के खिलाफ यह अवमानना याचिका दायर की थी।


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Thursday, February 8, 2024

बेटी की विदाई से पहले उठ गई पिता की अर्थी, मृतक विनोद के घर पसरा मातम

नई दिल्ली: दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन पर आज सुबह बड़ा हादसा हुआ है। दरअसल आज सुबह करीब 11 बजे पिंक लाइन के गोकुलपुरी मेट्रो स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर बनी दीवार भरभराकर गिर गई। जिसकी चपेट में आकर विनोद कुमार नाम के शख्स की मौत हो गई। जब इस हादसे के बारे में विनोद के परिवार को पता चला तो उनका रो- रोकर बुरा हाल हो गया।

घर में चल रही थी शादी की तैयारी

गोकुलपुरी हादसे में जान गंवाने वाले विनोद उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के एक गांव के रहने वाले थे लेकिन वो काम के सिलसिले में दिल्ली के करावल नगर में अपने बेटे के साथ रह रहे थे। विनोद दिल्ली में चावल डिलीवरी का काम करते थे और उनका बेटा सागर प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करता है। बता दें कि विनोद के घर में शादी की तैयारियां चल रही थी। दरअसल पिछले महीने 25 जनवरी को विनोद ने अपनी छोटी बेटी की सगाई की थी। जिसके बाद वो शादी की तैयारी के लिए दिल्ली आए थे और शादी की खरीदारी कर रहे थे।

जीटीबी एंक्लेव जा रहे थे विनोद

विनोद स्कूटी से चावल की डिलीवरी करने के लिए गुरुवार को जीटीबी एंक्लेव जा रहे थे। जैसे ही सुबह 11 बजे के करीब वो गोकुलपुरी मेट्रो स्टेशन के नीचे पहुंचे तो अचानकर उनके ऊपर दीवार गिर गई। जिसकी चपेट में आने से उनकी मौत हो गई। बता दें कि हादसे के बाद जो वीडियो और तस्वीरें आई हैं वहां पर विनोद की स्कूटी गिरी हुई दिख रही है।

क्या है पूरा मामला

हादसा गुरुवार सुबह लगभग 11 बजे हुआ। शिव विहार की ओर जाने वाली लाइन की तरफ के प्लैटफॉर्म की 50 मीटर लंबी दीवार अचानक भरभराकर नीचे आ गिरी। उस वक्त स्टेशन के नीचे से गुजर रहे स्कूटर सवार विनोद कुमार (53) समेत पांच लोग मलबे की चपेट में आ गए। बाद में इनमें से दो को फायर ब्रिगेड ने अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने विनोद कुमार को मृत घोषित कर दिया। अजीत कुमार, मोनू, संदीप, और ताजिर घायल हैं। हादसे के बाद दिल्ली मेट्रो के एमडी डॉ. विकास कुमार ने पूरे नेटवर्क की सेफ्टी चेकिंग के निर्देश दिए। मेट्रो ने मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों के लिए पांच लाख और मामूली घायलों के लिए एक लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है। दिल्ली मेट्रो ने हादसे की जानकारी कमिश्नर मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) को भी दी है।

2018 में ही बना है गोकुलपुरी का ये स्टेशन

जिस स्टेशन पर ये हादसा हुआ, उसका निर्माण 2018 में ही हुआ था। इसी वजह से निर्माण की क्वॉलिटी पर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों का मानना है कि जब ये हादसा हुआ, उस वक्त प्लैटफॉर्म पर अधिक भीड़ नहीं थी और सौभाग्यवश उस वक्त प्लैटफॉर्म पर इस दीवार से सटकर कोई यात्री नहीं खड़ा था। अगर ऐसा होता तो ये हादसा बड़ा हो सकता था।


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Wednesday, February 7, 2024

जो करना है RBI करेगा... सरकार ने झाड़ लिया है Paytm से पल्‍ला, रेगुलेटर के पाले में डाली गेंद!

नई दिल्ली: पेटीएम मुद्दे से निपटना (RBI) का काम है। सरकार का फिलहाल इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। ने बुधवार को इस मामले में सरकार का रुख साफ कर दिया है। उन्‍होंने कहा है कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (पीपीबीएल) एक छोटी वित्तीय इकाई है। इसमें कोई प्रणालीगत स्थिरता संबंधी चिंता नहीं है। नॉन-कम्‍प्‍लायंस को लेकर चिंताओं के बीच आरबीआई ने पीपीबीएल के खिलाफ कई कदम उठाए हैं। उसे 29 फरवरी के बाद जमा, प्रीपेड उपकरणों और ई-वॉलेट से संबंधित कोई भी सेवा प्रदान करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उसे नए ग्राहकों को जोड़ने से भी रोक दिया गया है।जोशी ने कहा, ‘यह रेगुलेटर की ओर से की गई कार्रवाई है। वे बैंकों को विनियमित करते हैं। जहां तक पेटीएम के खिलाफ कार्रवाई की बात है तो सरकार के पास अबतक करने के लिए कुछ नहीं है। हमारा मानना है कि आरबीआई ने उपभोक्ता और अर्थव्यवस्था के समग्र हित में कार्रवाई की होगी।’ पेटीएम की पेमेंट एग्रीगेटर अनुषंगी में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के संबंध में उन्होंने कहा कि चीन से निवेश के लिए अनुमति मांगी गई है।च‍िंंताओं पर क्‍या बोले व‍िवेक जोशी? वित्तीय सेवा सचिव के मुताब‍िक, ‘आवेदन की समीक्षा चल रही है क्योंकि यह एक अंतर-मंत्रालयी प्रक्रिया है। यह विचाराधीन है।’ पीपीबीएल के खिलाफ आरबीआई की कार्रवाई के कारण कोई वित्तीय स्थिरता संबंधी चिंताएं होने के सवाल पर जोशी ने कहा कि यह एक बहुत छोटा बैंक है। इससे प्रणालीगत स्थिरता संबंधी कोई चिंताएं नहीं हैं।उन्होंने कहा, 'जिन ग्राहकों का भुगतान बैंक में खाता है, उन्हें अपना खाता स्थानांतरित करना होगा... जहां तक मैं समझता हूं, यह बैंक नहीं है जो खातों को स्थानांतरित करेगा। यह ग्राहकों को करना होगा।’आरबीआई की कार्रवाई की पृष्ठभूमि में मंगलवार को पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की थी। सूत्रों ने कहा कि उन्हें यह स्पष्ट कर दिया गया था कि इस संबंध में पेटीएम को आरबीआई से ही मुखातिब होना पड़ेगा।क्‍या हैं पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर आरोप? आरोप है कि पीपीबीएल के पास लाखों गैर-केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) अनुपालन वाले खाते थे। कई मामलों में खाते खोलने के लिए एकल पैन (स्थायी खाता संख्या) का इस्तेमाल किया गया था।सूत्रों ने कहा कि ऐसे भी उदाहरण हैं जहां लेनदेन का कुल मूल्य करोड़ों रुपये का था जो न्यूनतम केवाईसी प्री-पेड उपकरणों में नियामकीय सीमा से कहीं अधिक था जिससे धन शोधन की चिंताएं बढ़ गईं।एक विश्लेषक के मुताबिक, पीपीबीएल के पास करीब 35 करोड़ ई-वॉलेट हैं। उनमें से करीब 31 करोड़ निष्क्रिय हैं जबकि केवल लगभग चार करोड़ ही बिना किसी बैलेंस या बहुत कम बैलेंस के साथ सक्रिय होंगे।


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Tuesday, February 6, 2024

मिस्र तक पहुंच सकती है इजरायल-हमास युद्ध की आंच, अमेरिकी विदेश मंत्री पहुंचे समझौता कराने, बंधकों की रिहाई पर जोर

काहिरा: मिस्र के नेताओं और अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात करने के लिए मंगलवार को काहिरा में मौजूद अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि उग्रवादियों से बंधकों को छुड़ाने के बदले इजराइल-हमास के बीच संघर्षविराम के लिए वार्ता करने पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इजराइल ने संकेत दिए हैं कि गाजा में जारी लड़ाई फैलकर मिस्र सीमा तक पहुंच सकती है, जिसको लेकर मिस्र में बढ़ती चिंताओं के बीच ब्लिंकन ने यह यात्रा की है। मिस्र सीमा पर फिलहाल बड़ी तादाद में विस्थापित फलस्तीनी शरण लिए हुए हैं।इजराइली रक्षा मंत्री ने कहा है कि इजराइल के हमले अंततः मिस्र की सीमा पर रफाह शहर तक पहुंच जाएंगे। गाजा की 23 लाख की आबादी में से आधे से अधिक लोगों ने रफाह शहर में शरण ले रखी है और वे दयनीय परिस्थितियों में रह रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय पर्यवेक्षकों ने मंगलवार को कहा कि गाजा छोड़ने का इजराइल का आदेश अब दो तिहाई क्षेत्र पर लागू हो गया है, जिसके चलते हर दिन हजारों लोग सीमावर्ती क्षेत्रों की ओर जा रहे हैं।

शांति समझौता खतरे में?

मिस्र ने आगाह किया है कि सीमा पर इजराइली सैनिकों की तैनाती से दोनों देशों के बीच चार दशक पहले हुआ शांति समझौता खतरे में पड़ जाएगा। मिस्र को डर है कि लड़ाई के रफाह क्षेत्र तक फैलने से भयभीत फलस्तीनी नागरिक सीमा पार करके मिस्र में दाखिल हो सकते हैं। ब्लिंकन ने मंगलवार को मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी से मुलाकात की। वह कहते रहे हैं कि कि फलस्तीनियों को गाजा से बाहर नहीं निकाला जाना चाहिए। ब्लिंकन अपनी इस यात्रा के दौरान संघर्षविराम समझौते, इजराइल और सऊदी अरब के बीच संबंधों को सामान्य बनाने और क्षेत्रीय लड़ाई को बढ़ने से रोकने पर जोर दे रहे हैं।

सीजफायर पर नहीं हो रही सहमति

हालांकि तीनों मुद्दों पर ब्लिंकन बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। हमास और इजराइल संभावित संघर्षविराम के लिए तैयार नहीं हैं। इजराइल ने फलस्तीनियों के लिए देश बनाने के अमेरिका के आह्वान को खारिज कर दिया है और क्षेत्र में ईरान के सहयोगी चरमपंथियों की तरफ से अमेरिकी हमलों से डरने का कोई बहुत अधिक संकेत नहीं दिखा है।


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