Saturday, September 7, 2024

प्राइवेट हॉस्पिटलों से रिश्वत लेकर CGHS पैनल में किया जा रहा था शामिल! सीबीआई ने मारा छापा

नई दिल्ली : और प्राइवेट हॉस्पिटलों के बीच बड़ा गोरखधंधा सामने आया है। इसमें पैसे लेकर सीजीएचएस मानकों को पूरा ना करने वाले अस्पतालों को भी सीजीएचएस पैनल में शामिल किया जा रहा था। इसके साथ ही कुछ प्राइवेट हॉस्पिटलों के एक-एक लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट का पैसा फर्जी साइन करके हजम किया गया। यह मामला जयपुर स्थित सीजीएचएस ऑफिस में सामने आया है। शिकायत मिलने के बाद ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की है। इस मामले में सीबीआई ने आरोपियों के जयपुर और अजमेर स्थित ठिकानों पर छापेमारी भी की।

CGHS जयपुर ऑफिस में मिली थी शिकायत

सीबीआई ने बताया कि इस मामले में सीजीएचएस जयपुर के एडिशनल डायरेक्टर डॉक्टर मीता भसीन की शिकायत मिली थी। इसमें सीजीएसएच जयपुर और कुछ निजी अस्पतालों के बीच गोरखधंधे के बारे में बताया गया। सीबीआई ने बताया कि फिलहाल इसमें सीजीएचएस में काम करने वाले राहुल शर्मा नाम के क्लर्क की भूमिका सामने आ रही है। लेकिन शक है कि यह काम अकेले का नहीं हो सकता। इसमें सीजीएचएस में काम करने वाले और भी अधिकारी या निचले स्तर के कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। जिसकी जांच शुरू कर दी गई है।

बड़े स्तर के अधिकारी के शामिल होने की आशंका

सीबीआई ने बताया कि इस मामले में गरिमा नाम की एक महिला का नाम भी सामने आ रहा है। इसके अलावा शक है कि इस रैकेट में बड़े स्तर पर सरकारी और निजी लोग शामिल हो सकते हैं। सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि मामले में सीबीआई ने सीजीएचएस में काम करने वाले आरोपी कर्मचारी और इससे गठजोड़ रखने वाले एक प्राइवेट हॉस्पिटल के प्रतिनिधि के खिलाफ मामला दर्ज कर इनके ठिकानों पर छापेमारी की।

तय मानक पर खरे नहीं उतर रहे थे अस्पताल

आरोप है कि सीजीएचएस जयपुर में काम करने वाला आरोपी क्लर्क अपने अन्य कुछ साथियों के साथ मिलकर रिश्वत लेकर ऐसे प्राइवेट अस्पतालों को सीजीएचएस पैनल में शामिल कराने के गोरखधंधे को अंजाम दे रहा था। जो सीजीएचएस पैनल में आने के लिए तय प्रक्रिया में खरे नहीं उतर रहे थे। ऐसे कुछ अस्पताल सीजीएचएस पैनल में शामिल किए गए। जिसकी भनक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में उच्च अधिकारियों को लगी। मामले में इंटरनल जांच शुरू की गई। इसके बाद मामले का खुलासा होने पर इसमें और गहराई से जांच कराने के लिए मामले को सीबीआई के सुपुर्द कर दिया गया। शक है कि यह गोरखधंधा बड़े स्तर पर अंजाम दिया जा रहा है।


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Friday, September 6, 2024

भागवत के 'हम भगवान बनेंगे या नहीं' वाले कमेंट से कांग्रेस ने पीएम मोदी को घेरा, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली: कांग्रेस ने केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी पर करारा तंज कसा। पार्टी की ओर से ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आएसएस) के बीच संबंधों में गिरावट आई है। विपक्षी दल के नेता ने यह भी दावा किया कि हर बीतते सप्ताह के साथ इस सरकार की उम्र कम होती जा रही है। जयराम रमेश ने अपनी पोस्ट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत की कुछ टिप्पणियों को भी मेंशन किया है। साथ ही कांग्रेस नेता एक मीडिया रिपोर्ट को टैग करते अपनी बात रखी है।

पीएम मोदी, आरएसएस के बीच संबंधों में आई गिरावट- जयराम रमेश

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में दावा किया कि 4 जून, 2024 के बाद से नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री और RSS के बीच संबंधों में गिरावट आई है। उनके बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। आज पुणे में एक कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने परमात्मा के अवतार वाले प्रधानमंत्री के दावे को लेकर उनपर निशाना साधते हुए कहा, 'हम भगवान बनेंगे या नहीं, इसका फैसला लोग करेंगे। हमें यह प्रचार नहीं करना चाहिए कि हम भगवान बन गए हैं।'

जयराम रमेश ने भागवत के बयान से पीएम मोदी को घेरा

जयराम रमेश ने आगे केंद्र की सरकार पर करारा वार किया। उन्होंने कहा कि हर बीतते सप्ताह के साथ इस सरकार की उम्र कम होती जा रही है। संघ प्रमुख मोहन भागवत, पुणे में शंकर दिनकर काणे (जिन्हें भैयाजी के नाम से भी जाना जाता है) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। जिन्होंने मणिपुर में काम किया। 1971 तक बच्चों की शिक्षा पर काम किया, छात्रों को महाराष्ट्र लाए और उनके ठहरने की व्यवस्था की।

विपक्ष लगातार कर रहा बीजेपी और मोदी पर कटाक्ष

लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद, भागवत ने जातीय संघर्ष से ग्रस्त मणिपुर में एक साल बाद भी शांति कायम नहीं होने पर चिंता जताई थी। चुनाव के दौरान आम विमर्श की आलोचना की थी और चुनाव खत्म होने तथा नतीजे आने के बाद क्या और कैसे होगा, इस संबंध में अनावश्यक बातचीत करने के बजाय आगे बढ़ने की अपील की थी। विपक्षी नेताओं ने उनके बयान का इस्तेमाल बीजेपी और मोदी पर कटाक्ष करने के लिए किया था।


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Thursday, September 5, 2024

दिल्ली : नाले में डूबने से मां-बेटे की गई थी जान, कोर्ट के आदेश पर DDA देगा पीड़ित परिजनों को 20 लाख मुआवजा

नई दिल्ली: दिल्ली के गाजीपुर में 31 जुलाई की शाम भारी बारिश के बाद बड़ी घटना सामने आई थी जब एक मां-बेटे की मौत निर्माणाधीन नाले में गिरकर हो गई थी। अब ने इस मामले में पीड़ित परिजनों को 20 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को आदेश दिया कि वह जुलाई में यहां खुले नाले में गिरकर मौत के मुंह में समा गए मां-बेटे के कानूनी उत्तराधिकारियों को 20 लाख रुपये का मुआवजा दे।

कोर्ट में क्या हुआ

डीडीए के वकील ने शुरू में कहा कि प्राधिकरण पीड़ित परिवार को मुआवजे के तौर पर 15 लाख रुपये देने को तैयार है। हालांकि, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने डीडीए को 20 लाख रुपये देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने इसके साथ ही कहा कि यही राशि ‘मानक’ है। पीठ में न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला भी शामिल थे। कोर्ट का आदेश आने के बाद गाजीपुर की घटना में जान गंवाने वाली तनुजा और बेटे प्रियांश के कानूनी उत्तराधिकारियों को डीडीए 20 लाख रुपये देने को तैयार है।

जानिए पूरा मामला

अदालत मयूर विहार फेज-3 निवासी झुन्नू लाल श्रीवास्तव की ओर से दायर उस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ठेकेदार और डीडीए अधिकारियों के खिलाफ उनकी कथित लापरवाही के लिए कार्रवाई की मांग की गई थी। ठेकेदार और डीडीए अधिकारियों की लापरवाही के कारण ही महिला और उसके तीन-वर्षीय बेटे की मौत हो गई थी। 31 जुलाई को हुई उस घटना को लेकर ने दलील दी थी कि मौतों से संबंधित आपराधिक मामले में एक चार्जशीट तैयार की गई है। इसमें जिम्मेदार अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के लिए सक्षम अधिकारियों से मंजूरी मिलने के बाद फाइनल चार्जशीट दायर की जाएगी।

डीडीए को कोर्ट ने दिए क्या आदेश

पुलिस के वकील ने पहले अदालत को बताया था कि यह डीडीए का एक ठेकेदार था, जिसने वहां कुछ काम करने के बाद घटनास्थल पर नाले को खुला छोड़ दिया था। अधिकारियों की ओर से अपनाए गए रुख को देखते हुए अदालत ने पाया कि आगे किसी आदेश का अनुरोध नहीं किया गया था, इसलिए इसने मामले में कार्रवाई बंद कर दी। पीठ ने एमसीडी के इस आश्वासन को भी रिकॉर्ड पर दर्ज किया कि जिस क्षेत्र में यह घटना हुई थी, वहां सभी मरम्मत, पुनर्विकास और निर्माण कार्य दिसंबर तक पूरे कर लिए जाएंगे।

कोर्ट ने एमसीडी को दिए सफाई के आदेश

अदालत ने नालियों की तस्वीरें देखने के बाद कहा कि यह जगह अब भी काफी गंदी है। नगर निगम से कहा गया कि वह इसे साफ करवाए, क्योंकि दिल्ली में डेंगू फैल रहा है। कोर्ट ने पिछले महीने मां-बेटे की मौत पर डीडीए को फटकार लगाई थी, क्योंकि उसने पाया था कि अधिकारियों ने ठेकेदार द्वारा किये गये काम की निगरानी नहीं की, जिसने कथित तौर पर नाले के कुछ हिस्सों को खुला छोड़ दिया था। इसके बाद अदालत ने डीडीए के वकील से कहा कि वह अगली सुनवाई की तारीख से पहले पीड़ित परिवार को मुआवजे के भुगतान के बारे में अपने मुवक्किल से निर्देश लेकर आयें।


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Wednesday, September 4, 2024

वन्यजीव आपदा क्षेत्र घोषित हुआ बहराइच, आदमखोर भेड़ियों की तलाश में आएगी और तेजी

बहराइचः बहराइच जिले की महसी तहसील में मानव-भेड़िये संघर्ष के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रभावित क्षेत्र में इसे 'वन्यजीव आपदा' घोषित कर दिया है। राज्य के एक मंत्री ने बुधवार को यह जानकारी दी।मत्स्य पालन मंत्री संजय कुमार निषाद ने बताया कि बहराइच जिले में मानव-पशु संघर्ष को देखते हुए इस क्षेत्र को वन्यजीव आपदा क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। मंत्री ने कहा कि क्षेत्र को वन्यजीव आपदा क्षेत्र घोषित करने से न केवल मनुष्यों पर हमला करने वाले जानवरों को पकड़ने के लिए जारी 'ऑपरेशन भेड़िया' में तेजी आएगी, बल्कि प्रभावित परिवारों को बिना किसी परेशानी के अनुग्रह राशि प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी।उन्होंने कहा, “किसी क्षेत्र को वन्यजीव आपदा क्षेत्र घोषित करने से पीड़ितों को तत्काल मुआवजा मिलना आसान हो जाता है। वन्यजीव अधिनियम में प्रावधान है कि जंगल में किसी खतरनाक जानवर का आतंक होने पर आदमखोर जानवरों को मारने आदि के संबंध में निर्णय लेने में देरी नहीं होती। इससे धनराशि आदि स्वीकृत करना भी आसान हो जाता है।” बहराइच में मार्च से ही भेड़ियों के हमले इंसानों पर हो रहे हैं। 17 जुलाई से जब बारिश का मौसम शुरू हुआ है, तब से हमले और भी बढ़ गए हैं।सोमवार तक भेड़ियों ने सात बच्चों सहित आठ लोगों को मार डाला और लगभग 36 को घायल कर दिया। बुधवार को बहराइच के दौरे पर आए वन एवं पर्यावरण मंत्री अरुण सक्सेना और जिला अधिकारियों के साथ बैठक कर भेड़ियों द्वारा किए जा रहे हमलों पर विस्तार से चर्चा की। दोनों मंत्रियों ने अस्पताल का दौरा भी किया और हमले में घायल ग्रामीणों का हालचाल जाना तथा अस्पताल प्रशासन को उन्हें सर्वोत्तम संभव उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।सक्सेना ने मीडिया से कहा, "मानव जीवन अमूल्य है, इसलिए मनुष्यों पर हमला करने वाले भेड़ियों को पकड़ने का आदेश जारी किया गया है। इसके लिए देहरादून से विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई है।" उन्होंने कहा, "भेड़ियों को पकड़ने के लिए स्थानीय स्तर पर भी टीमें बढ़ा दी गई हैं। उम्मीद है कि जल्द ही जानवरों को पिंजरे में बंद कर दिया जाएगा या ज़रूरत पड़ने पर गोली मार दी जाएगी।"


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Tuesday, September 3, 2024

लालू यादव का मास्टर स्ट्रोक, बिहार में सियासी भूचाल लाने की तैयारी

पटनाः आरजेडी सुप्रीमो स्वास्थ्य जांच के बाद सिंगापुर से लौट आए हैं। आते ही उनकी सियासी गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। लालू के बेटे और बिहार के पूर्व डेप्युटी सीएम तेजस्वी यादव ने 10 सितंबर से बिहार में आभार यात्रा की घोषणा की है। वे अपने स्तर से इसकी तैयारियों में तो जुटे ही हैं, लेकिन अब लालू ने भी उनकी यात्रा की कामयाबी के लिए अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। आरजेडी ने अपने सभी विधायकों और विधान पार्षदों की चार सितंबर को पटना में बैठक बुलाई है। विधानसभा के पूर्व प्रत्याशियों को बैठक का न्योता गया है। नेताओं का पटना पहुंचना भी आज मंगलवार से शुरू हो गया है। बैठक के बारे में सबको यही सूचना दी गई है कि संगठन को मजबूत करने के लिए सबको बुलाया गया है। आरजेडी के अंदरखाने से निकली जानकारी के मुताबिक तेजस्वी की आभार यात्रा के अलावा अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के के कोर एजेंडे पर चर्चा होगी। लालू सबको बताएंगे कि किन मुद्दों पर चुनावी माहौल बनाना है।

आरजेडी ने तय किए हैं दो बड़े मुद्दे

जो जानकारी निकल कर सामने आ रही है, उसके मुताबिक दूसरे मुद्दों के अलावा दो बड़े मुद्दे ही चुनावी माहौल बना सकते हैं। ये मुद्दे आरजेडी और इंडिया ब्लाक में शामिल सभी दलों को सूट भी करते हैं। इनमें पहला बड़ा मुद्दा है जाति जनगणना का। यद्यपि बिहार में यह काम हो चुका है, इसलिए इसे बड़ा मुद्दा नहीं कहा जा सकता है, लेकिन राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में यह दीर्घकालिक असर पैदा कर सकता है। कांग्रेस भी जाति जनगणना को लेकर मुखर रही है। लालू तो जाति जनगणना की मांग करने वालों में अपने को अव्वल ही मानते हैं। तेजस्वी यादव ने कहना भी शुरू कर दिया है कि जाति जनगणना की मांग सबसे पहले लालू प्रसाद यादव ने ही की थी।

आरएसएस से लालू को बल मिला

आरएसएस ने भी जाति जनगणना के सवाल पर अपनी सहमति देकर लालू और इंडिया ब्लाक के अन्य नेताओं को ताकत दी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) सोमवार को जाति जनगणना पर अपने विचार बताए। संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर का कहना कि जाति जनगणना संवदेनशील मामला है। इसका इस्तेमाल राजनीतिक या चुनावी उद्देश्यों के लिए नहीं होना चाहिए। कल्याण की नीयत से इसका इस्तेमाल पिछड़ रहे समुदाय और जातियों के उत्थान के लिए होना चाहिए। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उप वर्गीकरण की दिशा में बिना किसी सर्वसम्मति के कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए। आरएसएस की यह राय विपक्ष की मांग का समर्थन है। इससे लालू का उत्साहित होना स्वाभाविक है। इसलिए केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर हामी भरने तक लालू अलख जगाए रखना चाहते हैं।

कास्ट सेंसस और आरक्षण बड़े मुद्दे

लालू बुधवार को पार्टी नेताओं की बैठक में जाति जनगणना और बिहार में बढ़ाए गए आरक्षण की सीमा पर रोक को मुद्दा बनाने का निर्देश देंगे। केंद्र सरकार पहले कतिपय कारण बता कर जाति जनगणना कराने से कर चुकी है। जाति जनगणना के पक्ष में आरएसएस के आ जाने से केंद्र सरकार अगर जाति जनगणना कराने का निर्णय लेती है तो लालू और विपक्ष के नेता इसे अपनी जीत बता कर चुनाव में भुनाने का भरपूर प्रयास करेंगे। चूंकि बिहार में यह काम नीतीश कुमार करा चुके हैं, इसलिए तेजस्वी इसका लाभ उठा पाएंगे कि नहीं, यह देखने वाली बात होगी। बिहार में जाति सर्वेक्षण के बाद आरक्षण की सीमा बढ़ा कर 65 प्रतिशत कर दी गई। अदालत ने इस पर रोक लगा दी है। आरजेडी इसका ठीकरा नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी सरकार पर फोड़ेंगे। वे बताएंगे कि आरक्षण विरोधी होने के कारण मोदी सरकार ने इसे नौवीं अनुसूची में शामिल करने के नीतीश कुमार के अनुरोध पर विचार नहीं किया। इसके बावजूद नीतीश भाजपा के सहयोगी बने हुए हैं।

अपराध वृद्धि भी होगा मुद्दा

बिहार में अपराध के आंकड़े हाल के दिनों में अपने ‘एक्स’ हैंडल पर डालते रहे हैं। ऐसा कर वे आरजेडी पर जंगल राज के धब्बे को मिटाना चाहते हैं। इसलिए घूम-घूम कर वे लोगों को बताएंगे कि एनडीए के लोग बेजां आरजेडी को बदनाम करते हैं। अब तो आरजेडी का शासन नहीं है। फिर अपराध बेकाबू क्यों हैं। अफसरों के भ्रष्टाचार को भी तेजस्वी जोर-शोर से उठाएंगे।


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Monday, September 2, 2024

नॉर्वे की 52 साल की राजकुमारी ने तांत्रिक से की शादी, गवाह बनी फिल्मी सितारों की भारी भीड़

ओस्लो: नॉर्वे के राज की सबसे बड़ी संतान राजकुमारी मार्था लुईस ने एक अमेरिकी तांत्रिक से शादी की है। उनके इस शादी समारोह में सोशल मीडिया स्टार, रियलिटी स्टार और टीवी इंडस्ट्री की दिग्गज हस्तियां शामिल हुईं। यह शादी समारोह तीन दिनों के जश्न के बाद आयोजित किया गया। 52 साल की मार्था लुईस और ड्यूरेक वेरेट ने नॉर्वे के प्रमुख पर्यटक आकर्षणों में से एक गेरांगर के सुरम्य शहर में विवाद किया। यह शहर आश्चर्यजनक दृश्यों वाले एक फजॉर्ड पर स्थित है। ड्यूरेक वेरेट खुद को कैलिफोर्निया से छठी पीढ़ी के जादूगर होने का दावा करते हैं।

रंगारंग कार्यक्रम भी हुए आयोजित

गुरुवार को शुरू हुए उत्सव के बाद वास्तविक विवाह समारोह एक हरे-भरे लॉन में लगे एक बड़े सफेद तम्बू में हुआ। इस समारोह में शामिल हुए मेहमानों ने बताया कि नॉर्वे और अमेरिका के कलाकारों ने इस कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति दी। नॉर्वेजियन टीवी स्टार हेराल्ड रोनबर्ग ने सार्वजनिक प्रसारक NRK को इस रंगारंग समारोह के बारे में बताया। उन्होंने कहा, "यह शानदार था! यह हॉलीवुड और गेइरेंजर का मिलन था।" उन्होंने यह भी बताया, "इस कार्यक्रम को देखकर हम खूब हंसे और जमकर तालियां बजाई। यह बेहद खूबसूरत था।"

नॉर्वे का शाही परिवार हुआ शामिल

इस जोड़े ने अपनी शादी के फोटो राइट्स ब्रिटिश सेलिब्रिटी मैगजीन हेलो! और फिल्म राइट्स नेटफ्लिक्स को बेच दिए हैं। इस सौदे का नॉर्वेजियन मीडिया ने काफी विरोध भी किया। उनका कहना था कि यह व्यवस्था स्थानीय प्रथाओं के खिलाफ है। हालांकि, इस जोड़े ने प्रेस के आरोपों को खारिज कर दिया है। इस समारोह में नॉर्वे के 87 वर्षीय राजा हेराल्ड और रानी सोनजा भी नॉर्वेजियन शाही घराने के अन्य सदस्यों के साथ शामिल हुए। क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया और उनके पति प्रिंस डैनियल ने अपने भाई, प्रिंस कार्ल फिलिप और उनकी पत्नी, प्रिंसेस सोफिया के साथ स्वीडिश शाही घराने का प्रतिनिधित्व किया। शादी में कोई अन्य यूरोपीय शाही परिवार शामिल नहीं हुआ।


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Sunday, September 1, 2024

मिड-डे मील के लिए राशन की जगह भेजे कंकड़-पत्थर, फतेहपुर के स्कूल का हैरान करने वाला मामला

इरशाद सिद्दीकी, फतेहपुर: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में एक कंपोजिट विद्यालय को दिए गए मिड-डे मील के राशन में कंकड़-पत्थर मिले हैं। राशन में कंकड़ों की अधिक मात्रा देखकर विद्यालय के शिक्षक और रसोइयां हैरान रह गए। वहीं, इस राशन से स्कूल में बनने वाले से बच्चों के स्वास्थ्य में प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जाहिर करते हुए अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है।

कोटेदारों के यहां से जाता है राशन

कंपोजिट विद्यालयों में बच्चों को पका पकाया खाना मिड-डे मील देने के लिए शासन से निर्देश है। बच्चों के लिए सप्ताह में हर दिन के अनुसार अलग-अलग स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ फलों को भी देने का शासन ने मेनू बनाया है। जिसके तहत स्कूल के स्टाफ को मैनुअल के हिसाब से बच्चों को एमडीएम देने के सख्त निर्देश दिए हैं। वहीं, स्कूलों के लिए पूर्ति विभाग से कोटेदारों को गेहूं, चावल भी उपलब्ध कराया जाता है।

दोषी पाए जाने पर होगी कार्रवाई: सप्लाई इंस्पेक्टर

राशन को ग्राम प्रधानों के माध्यम से विद्यालय में पहुंचाया जाता है। शनिवार को ऐरायां ब्लॉक के छीमी गांव स्थित कंपोजिट विद्यालय में एमडीएम के लिए आए गेहूं को जब सुबह रसोइयां ने निकाला तो उसमें भारी मात्रा में कंकड़-पत्थर दिखाई दिए, तो यह जानकारी स्कूल के शिक्षकों को दी। सप्लाई इंस्पेक्टर भास्कर मिश्रा ने कहा कि मामले की जानकारी हुई है। जांच की जाएगी। इस दौरान दोषी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। यूपी के सरकारी स्कूलों में मिलने वाले मध्याह्न भोजन का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बहुत सारे मामले सामने आ चुके हैं।


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