Wednesday, November 13, 2024

ट्रूडो सरकार की एक और हरकत, भारत में आतंक के आरोपी अफसर को दे दी क्लीन चिट

Canada-India Relations: भारत और कनाडा के संबंधों की कड़वाहट अब और ज्यादा बढ़ने लगी है. कनाडा सरकार ने भारत में आतंक के आरोपी अपने एक अफसर को क्लीन चिट दे दी. इसके कारण भारत की नाराजगी बढ़नी स्वाभाविक ही है.

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Tuesday, November 12, 2024

टीम इंडिया के रहे बैटिंग कोच, IPL के महागुरु, कितनी दौलत के मालिक हैं संजय बांगर, जानें उनकी नेटवर्थ

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के पूर्व खिलाड़ी और बैटिंग कोच रहे संजय बांगर अपने बेटे आर्यन को लेकर चर्चा में हैं। हालांकि, आर्यन अब अनाया बांगर बन चुके हैं। दरअसल आर्यन ने करीब 10 महीने पहले अपनी जेंडर ट्रांजिशन की शुरुआत की थी। इस प्रक्रिया को हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थैरेपी या HRT कहते हैं। इस थेरेपी से शरीर में धीरे-धीरे हार्मोनल बदलाव देखने को मिलते हैं। आर्यन ने जब इस थैरेपी को पूरा किया तो उन्होंने अपना नाम बदलकर अनाया कर लिया है। आर्यन से अनाया बनने के बाद उनके पिता संजय बांगर ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन इसका इसका खुलासा होने के बाद संजय बांगर की अब खूब चर्चा हो रही है। ऐसे में आइए जानते हैं संजय बांगर के क्रिकेट करियर से लेकर कोच बनने के सफर और उनके कुल नेटवर्थ के बारे में। संजय बांगर का क्रिकेटिंग सफरसंजय बांगर का जन्म 11 अक्टूबर 1972 को महाराष्ट्र के भीड में हुआ था। संजय बांगर ने टीम इंडिया के लिए साल 2001 में टेस्ट डेब्यू किया था। टेस्ट डेब्यू के अगले साल ही उन्हें वनडे में भी खेलने का मौका मिल गया। उनके क्रिकेटिंग करियर की बात करें तो वह भारत के लिए 12 टेस्ट और 15 वनडे मैच में मैदान पर उतरे। टेस्ट क्रिकेट में संजय ने भारत के लिए 470 रन बनाए जिसमें एक शतक और तीन अर्धशतक शामिल है। वहीं गेंदबाजी में उनके नाम 7 विकेट रहा। वहीं वनडे की बात की जाए तो उन्होंन े इस फॉर्मेट में 180 रन बनाने के साथ-साथ 7 विकेट लिए हैं। टीम इंडिया और आईपीएल में रहे हैं कोच क्रिकेट से रिटायरमेंट के बाद संजय बांगर ने साल 2014 में कोचिंग में अपना डेब्यू किया। उन्हें पहली बार टीम इंडिया का बैटिंग कोच गया था। संजय बांगर साल 2019 विश्व कप तक इस पद पर बने रहे थे। टीम इंडिया के अलावा संजय बांगर आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और पंजाब किंग्स में कोचिंग स्टाफ के सदस्य रह चुके हैं। इस कारण उनके पास कोचिंग का भी अच्छा अनुभव है। कितनी है संजय बांगर की नेटवर्थ संजय बांगर का टीम इंडिया के लिए करियर कुछ खास नहीं रहा था। यही कारण है कि सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली के दौर में खेलने के बावजूद भी उनकी एक खिलाड़ी के तौर पर बहुत अधिक प्रसिद्धी नहीं रही। हालांकि, कोचिंग में उन्होंने जरूर नाम कमाया। यही कारण है कि उनके लिए ये कमाई का सबसे बड़ा जरिया बना। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संजय बांगर की कुल नेटवर्थ 10 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। उनकी कमाई का मुख्य जरिया आईपीएल फ्रेंचाइजी और टीम इंडिया की कोचिंग रही है। इसके अलावा उनके पर्सनल लाइफ, घर और गाड़ी के बारे में कुछ खास जानकारी नहीं है।


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सस्ते कर्ज की राह में कैसे बड़ी चुनौती बनी फूड इंफ्लेशन?

नई दिल्ली: रिटेल इंफ्लेशन को काबू करने की कोशिशों में फूड इंफ्लेशन एक बड़ी चुनौती बन गई है। जहां नॉन-फूड इंफ्लेशन लगातार 11वें महीने 3% के करीब रही, वहीं सितंबर में 9.24% पर पहुंचने के बाद अक्टूबर में फूड इंफ्लेशन 10.87% पर पहुंच गई। यह पिछले साल जुलाई के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है। दालों के बड़े पैमाने पर आयात के साथ सरकारी मोबाइल वैन से दिल्ली सहित प्रमुख शहरों में कम दाम पर प्याज और टमाटर बेचने के बावजूद यह स्थिति बनी है। सब्जियों की महंगाई दर 42.2% पर पहुंच गई, जो इसका 57 महीनों का ऊंचा स्तर है। खाद्य तेलों के दाम भी उछल गए। वैश्विक स्तर पर कीमतें बढ़ने के साथ आयात शुल्क बढ़ाने का असर पड़ा। सरकार ने सितंबर में कुछ रिफाइंड वेरायटी पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी 12.5% से बढ़ाकर 32.5% कर दी थी।मंगलवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, शहरों में रिटेल फूड इंफ्लेशन 11.09% और गांवों में 10.69% रही। सितंबर में फूड इंफ्लेशन 9.24% और सालभर पहले अक्टूबर में 6.61% थी। फूड इंफ्लेशन 14 महीनों बाद दहाई के आंकड़े में पहुंची है। मंत्रालय ने कहा, ‘अक्टूबर में दालों, अंडों, चीनी और मसालों की महंगाई में काफी कमी देखी गई। ऊंची फूड इंफ्लेशन के पीछे मुख्य रूप से सब्जियों, फलों और तेलों के दाम बढ़ने का हाथ रहा।’

क्या कहते हैं जानकार

केयरएज की चीफ इकनॉमिस्ट रजनी सिन्हा ने कहा, ‘फूड इंफ्लेशन को मैनेज करना जरूरी है क्योंकि इसका असर हाउसहोल्ड इंफ्लेशन एक्सपेक्टेशंस पर पड़ता है। सरकार को खाने-पीने की चीजों की महंगाई पर काबू पाने के लिए सप्लाई के मोर्चे पर और कदम उठाने की जरूरत है।’ फूड एंड बेवरेजेज का रिटेल इंफ्लेशन बढ़ाने में बड़ा हाथ रहा, जिसका कंस्यूमर प्राइस इंडेक्स में 45.86% हिस्सा है। फूड एंड बेवरेजेज की इंफ्लेशन अक्टूबर में 9.69% रही, जो सितंबर में 8.36% थी। फलों में महंगाई दर 8.43% पर पहुंच गई, जो सितंबर में 7.65% पर थी। अनाज में महंगाई 6.94% और मीट-मछली में 3.17% रही। वहीं, मसालों के दाम 7% नीचे आए। दालों में महंगाई 7.4% रही। खाद्य तेलों के दाम 9.5% बढ़े।सब्जियों में खासतौर से टमाटर और प्याज के दाम ज्यादा बढ़े। देश के कुछ इलाकों में बेमौसम बारिश का इसमें बड़ा हाथ रहा। वहीं, वैश्विक स्तर पर खाद्य तेलों के दाम सालभर पहले के मुकाबले 27% बढ़े। इस बीच, 14 सितंबर को सरकार ने तिलहन किसानों के हितों का हवाला देकर खाद्य तेलों पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी बढ़ा दी थी। इसका असर एडिबल ऑयल इंफ्लेशन पर पड़ा।

सब्जियों की कीमत

ICRA की चीफ इकनॉमिस्ट अदिति नायर ने कहा, ‘सितंबर में 36% से बढ़कर वेजिटेबल इंफ्लेशन अक्टूबर में 42.2% के साथ 57 महीनों के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। इसका असर फूड एंड बेवरेजेज सेगमेंट और ओवरऑल रिटेल इंफ्लेशन पर पड़ा। रिटेल इंफ्लेशन के 14 महीनों के ऊंचे स्तर पर पहुंचने में फूड एंड बेवरेजेज सेगमेंट में इंफ्लेशन बढ़ने का बड़ा हाथ रहा। 12 फूड ग्रुप्स में से 7 में इंफ्लेशन बढ़ी। सब्जियों को हटा दें तो फूड एंड बेवरेजेज इंफ्लेशन 4.3% पर और रिटेल इंफ्लेशन 3.6% पर आ जाएगी।’फूड एंड बेवरेजेज, फ्यूल एंड लाइ और पेट्रोल-डीजल को हटाने के बाद दिखने वाली कोर इंफ्लेशन अक्टूबर में कुछ बढ़ी, लेकिन लगातार 11वें महीने 4% से नीचे रही। वहीं, फ्यूल इंफ्लेशन लगातार 14वें महीने नेगेटिव जोन में बनी रही। क्रिसिल के चीफ इकनॉमिस्ट डी के जोशी ने कहा, ‘नॉन-फूड इंफ्लेशन 3 प्रतिशत के करीब बनी हुई है, लेकिन फूड इंफ्लेशन बार-बार बढ़ने के चलते रिटेल इंफ्लेशन ज्यादा बनी हुई है। इसे देखते हुए दिसंबर में आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी रीपो रेट जस का तस बनाए रख सकती है।’

तेल की कीमत

प्रभुदास लीलाधर के इकनॉमिस्ट अर्श मोगरे ने कहा, ‘ग्लोबल फैक्टर्स से चुनौती बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपस हैं, लेकिन इंपोर्टेड इंफ्लेशन का रिस्क बरकरार है, खासतौर से पश्चिम एशिया में तनाव और रेड सी इलाकों में मुश्किलों की वजह से।’ ICRA की चीफ इकनॉमिस्ट अदिति नायर ने कहा, ‘CPI इंफ्लेशन ने अक्टूबर में 6% का दायरा पार कर लिया है। इस वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में यह आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के अनुमान से 60-70 बेसिस पॉइंट्स अधिक रह सकती है। दिसंबर की एमपीसी मीटिंग में रेट घटाए जाने की गुंजाइश नहीं है। अब अगले साल फरवरी में या उसके बाद 50 बेसिस पॉइंट्स के रेट कट साइकल की शुरुआत हो सकती है।’केयरएज की चीफ इकनॉमिस्ट रजनी सिन्हा ने कहा, ‘मौजूदा ट्रेंड से लग रहा है कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में इंफ्लेशन आरबीआई के अक्टूबर में दिए गए अनुमान से आगे निकल सकती है। दिसंबर में रेपो रेट जस का तस रह सकता है। फूड इंफ्लेशन घटने पर फरवरी मीटिंग में 25 बेसिस पॉइंट्स का रेट कट हो सकता है।’

लगाना होगा जोर, सुधर सकते हैं हालात

खरीफ सीजन की फसल आने से खाने-पीने की चीजों की महंगाई घटने की उम्मीद है। रबी सीजन में अच्छी बुआई का अनुमान है। ग्लोबल कमोडिटी प्राइसेज में नरमी से भी मदद मिलेगी। हालांकि पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ा तो ग्लोबल कमोडिटी मार्केट्स और सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ सकता है। इस बीच, सरकार सब्जियों और दूसरी जरूरी चीजों की सप्लाई बढ़ाने पर जोर लगा रही है, जिससे स्थिति सुधर सकती है।


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तुम्हें खत्म कर दूंगा! कपड़ा कारोबारी को लॉरेंस बिश्नोई से जान से मारने की मिली धमकी

मुकेश पटेल, कुशीनगर: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में भी लॉरेंस विश्नोई गैंग के लोग सक्रिय हो चुके हैं। जिले फाजिलनगर कस्बे में स्थित एक कपड़ा व्यवसायी को मारने की धमकी मिली है। इससे व्यवसायी समेत उसका पूरा परिवार सहमा हुआ है। वहीं पीड़ित ने पुलिस को तहरीर देकर अपनी आपबीती बताई। पुलिस तत्काल प्रभाव से मुकदमा दर्ज कर आरोपी के तलाश में जुट गई है। कई नंबरों से आया फोनमामला जिले के फाजिलनगर कस्बे का है यहां दीपक रौनियार नाम के व्यक्ति का फाजिलनगर मेन मार्केट में कपड़े की दुकान है। दीपक रौनियर को 4 नवंबर को उसके फोन पर अनजान नंबर से काल आई। फोन उठाते ही दूसरी ओर से युवक भद्दी-भद्दी गालियां देते हुए लारेंस गैंग का सदस्य बताकर जान से मारने की धमकी देने लगा।इसके बाद बीते शनिवार शाम से रात 11 बजे के आसपास अलग-अलग नंबरों से फोन आने लगे और फोन करने वाले ने जान से मारने धमकी दी। व्यापारी के पास फोन करने वाले ने कहा- 'चाहे तू किसी से शिकायत कर लो, लेकिन तुम बच नहीं पाओगे, पुलिस तुम्हें नहीं बचा सकती। तुम्हारी सुपारी दी गई है। मैं तुम्हें खत्म कर दूंगा। अगर बचा सकते हो तो खुद को बचाने की कोशिश करो' जिसके बाद डरा सहमा पीड़ित पुलिस को शिकायत किया जिसके बाद पुलिस जांच में जुट गई।लोकेशन की जांच कर रही पुलिसथानाध्यक्ष पटहेरवा दीपक कुमार सिंह ने बताया- तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर फोन करने वाले नंबरों का लोकेशन और अन्य चीजों की जांच की जा रही है। एक-दो नंबरों के जांच में पश्चिम बंगाल का नंबर बताया जा रहा। जो स्पैम नंबर है। जल्द ही आरोपी पुलिस के गिरफ्त में होगा।


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ACB Trap: नगर निगम जयपुर हैरिटेज का भ्रष्टाचार आया सामने, सेनेटरी इंस्पेक्टर ने ली रिश्वत, एसीबी ने रंगे हाथों पकड़ा

जयपुर: जयपुर शहर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने सेनेटरी इंस्पेक्टर को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी जयपुर नगर निगम हेरिटेज के आदर्श नगर जोन का इंस्पेक्टर है। उसका कार्य सफाई व्यवस्था का निरीक्षण करना है। सफाई निरीक्षक देव कुमार के अधीन जोन के सौ से ज्यादा सफाईकर्मी काम करते हैं। एक युवक ने पिछले दिनों एसीबी में शिकायत दर्ज कराई कि उसके पिता नगर निगम में सफाईकर्मी है। पिता को ड्यूटी में परेशान नहीं करने और हाजरी माफी देने की एवज में सफाई निरीक्षक रिश्वत की मांग कर रहा है। 3 हजार रुपए प्रति महीने के हिसाब से मांगे जा रहे हैं। एसीबी ने सत्यापन कराया को शिकायत सही पाई गई।

मंगलवार दोपहर को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार

परिवादी की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत का सत्यापन होने के बाद एसीबी ने ट्रैप का जाल बिछाया। उधर निरीक्षक भी लगातार परिवादी को परेशान कर रहा था। एसीबी द्वारा ट्रेप की पूरी तैयारी करने के बाद सोमवार को परिवादी ने सफाई निरीक्षक देव कुमार से संपर्क किया। देव कुमार ने रिश्वत की राशि लेकर ऑफिस बुलाया। परिवादी ने जैसे ही रिश्वत की राशि के रूप में छह हजार रुपए दिए तो देव कुमार ने अपनी जेब में रख लिए। इसके तुरंत बाद एसीबी की टीम ने दबिश दी और देव कुमार को गिरफ्तार कर लिया।हाजरी माफी और कार्य नहीं करने की छूट का झांसापरिवादी के मुताबिक उसके पिता कुछ दिन अनुपस्थित रहे थे। इस वजह से सफाई निरीक्षक देव कुमार को परेशान करने का मौका मिल गया। वह हाजरी में छूट देने और काम नहीं करने के बावजूद भी हाजरी लगाने की बात कह कर हर महीने तीन हजार रुपए लेने का दबाव बनाने लगा। पिछले दो महीनों से लगातार रुपए की मांग कर रहा था। परेशान होकर पीड़ित ने एसीबी में शिकायत की जिसके बाद एसीबी ने ट्रेप की कार्रवाई को अंजाम दिया।


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Monday, November 11, 2024

मुस्लिम देशों की मीटिंग में शामिल नहीं हुए ईरानी राष्ट्रपति, सऊदी प्रिंस को पहले ही दी थी जानकारी, ये है कारण

तेहरान: इजरायल-हमास युद्ध को एक साल से ज्यादा का समय हो गया है। गाजा और लेबनान में बढ़ते संकट को देखते हुए में सोमवार को एक महत्वपूर्ण अरब-इस्लामिक शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया। अरब और इस्लामी दुनिया भर के नेताओं ने इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। लेकिन ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान इसमें शामिल नहीं हुए। शिखर सम्मेलन में शामिल न होने के पीछे उन्होंने व्यस्तता को कारण बताया।ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ईरान-सऊदी अरब संबंधों पर चर्चा के लिए फोन पर बातचीत की। दोनों के बीच रविवार शाम को बात हुई। इसके बाद ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि वह सोमवार यानी 11 नवंबर को अरब लीग और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की संयुक्त मीटिंग में हिस्सा लेने में असमर्थ होंगे। ईरान की सरकारी मीडिया IRNA के मुताबिक ईरानी राष्ट्रपति ने दावा किया कि उनका कार्यक्रम व्यस्त है।

इजरायल की आलोचना करता रहा है सऊदी

इतनी अहम मीटिंग में ईरान के न शामिल होने का फैसला दिलचस्प है। ऐसा माना जा सकता है कि ईरान अपने राष्ट्रपति को मीटिंग में तभी शामिल करना चाहेगा जब इसका इस्तेमाल केवल इजरायल के खिलाफ समर्थन जुटाने के लिए हो। सऊदी अरब गाजा और लेबनान में इजरायली कार्रवाई की आलोचना करता रहा है। सऊदी अरब इस मीटिंग का इस्तेमाल अरब और मुस्लिम दुनिया के अपने नेतृत्व को दिखाने के लिए करना चाहता है।

ईरान के उपराष्ट्रपति होंगे शामिल

ईरानी मीडिया ने कहा, 'पेजेशकिया ने कहा कि उनके उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा अरेफ बैठक में हिस्सा लेंगे। ईरानी और सऊदी अधिकारियों के दृढ़ संकल्प का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति पेजेशकियान ने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच संबंध और विकसित होंगे।' सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने कहा कि वह समझते हैं कि पेजेशकियान इसमें शामिल नहीं होंगे और उन्होंने ईरान की सफलता की कामना की।


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Sunday, November 10, 2024

राजस्थान उपचुनाव 2024: नेताओं को संयमित भाषा अपनाने की दी नसीहत, टोंक में बोले सचिन पायलट

Keywords psis y टोेंक : राजस्थान में 13 नवंबर की तिथि नजदीक आने के साथ सियासत का पारा लगातार चढ़ता ही जा रहा है। इस दौरान राजस्थान के टोंक जिले की देवली उनियारा विधानसभा सीट पर कांग्रेस के दिग्गज और टोंक विधायक सचिन पायलट ने हुंकार भरी है। उन्होंने भजनलाल सरकार को जमकर घेरते हुए सियासी हमले किए। इस दौरान एक फिर रघु शर्मा के ‘कत्ले आम‘ का बयान लेकर मुद्दा गरमाया। उन्होंने नेताओं को संयमित भाषा उपयोग करने की नसीहत दी। इस चुनावी सभा में सचिन पायलट के करीबी रह चुके निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा को टोंक सांसद हरीश मीणा ने उनके ही सामने जमकर घेरा। उन्होंने नरेश मीणा को बीजेपी का एजेंट बता दिया। उन्होंने कहा कि वह जिस थाली में खाता है, उसी में छेद करता है।

पायलट ने सरकार को घेरा, तो नेताओं को संयमित भाषा की नसीहत दी

दरअसल, सचिन पायलट टोंक जिले के उनियारा में रविवार को कांग्रेसी प्रत्याशी कस्तूर चंद मीणा के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने भजनलाल सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि 11 महीने में जनता का मोह इस सरकार से भंग हो चुका है। अब 4 साल बाद फिर से राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनने वाली है। इस दौरान पायलट ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और कांग्रेसी नेता रघु शर्मा के बयानों को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि राजनीति में संयमित भाषा होनी चाहिए, जो मैंने स्वर्गीय पायलट साहब से यह सीखी।

पायलट के करीबी नरेश मीणा को जमकर घेरा सांसद ने

सचिन पायलट के खास रह चुके निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा को टोंक सांसद हरीश मीणा ने उनके ही सामने जमकर घेरा। उन्होंने नरेश मीणा को बीजेपी का एजेंट तक बताया। उन्होंने नरेश मीणा से पूछा कि कि एक हजार गाड़ियों और शराब का पैसा कौन दे रहा है? वह कहता है कि मैं कांग्रेस का सिपाही हूं, जबकि यह आदमी बीजेपी का एजेंट है। इस आदमी के राजस्थान की पुलिस पीछे पड़ी है। उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि यह आदमी जिस थाली में खाता है, उसी में छेद करता हैै।हरीश मीणा और नरेश मीणा के बीच जुबानी जंग जारीदेवली उनियारा विधानसभा उपचुनाव को लेकर सांसद हरीश मीणा और नरेश मीणा के बीच जमकर जुबानी जंग छिड़ी हुई है। बीते दिनों नरेश मीणा ने अपना टिकट कटने की वजह टोंक सांसद हरीश मीणा को बताया। उन्होंने हरीश मीणा के खिलाफ जमकर बयान बाजी की। जवाब में सांसद हरीश मीणा भी नरेश मीणा को 'चोर और उठाईगिरा' बताते हुए नजर आ रहे हैं। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी जमकर वायरल हुआ। उन्होंने कहा कि “यह भाड़े के लोग 10 को ही चले जाएंगे…जो आदमी कभी मुरारी लाल मीणा को गाली देता है, कभी प्रमोद जैन भाया को गाली निकालता है, कभी शांति धारीवाल को गाली देता है, छबड़ा में करण सिंह जी को हरा दिया…है कौन ये, क्या संस्कार है इसके…हमें ऐसे उठाईगिरों और चोरों से ईमानदारी का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए।”


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